महाराष्ट्र राज्य में बारिश ने बदला खरीफ का गणित, 31 जिलों में फसलें संकट में, सोयाबीन-कपास पर सबसे बड़ा खतरा

Maharashtra Kharif Season: महाराष्ट्र में 94 फीसदी खरीफ बुआई पूरी होने के बाद बारिश की लंबी कमी ने फसलों की चिंता बढ़ा दी है। 31 जिलों में सोयाबीन, कपास और तुअर प्रभावित हैं।
Maharashtra Rainfall Deficit
खेत में बैठा किसान प्रतिकात्मक तस्वीर, सोर्स- AI
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Maharashtra Rainfall Deficit: जुलाई में हुई बारिश के चलते महाराष्ट्र में इस साल खरीफ सीजन में 94 फीसदी बुआई पूरी हो गई थी। शुरुआती दौर में अधिकांश क्षेत्रों में फसलों की अच्छी बढ़वार भी हुई लेकिन फसल वृद्धि के महत्वपूर्ण दौर में 40 से 89 फीसदी तक कम बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

फसल की गंभीर स्थिति के कारण राज्य के 36 में से 31 जिले प्रभावित हुए हैं। अब बारिश होने के बावजूद नुकसान की भरपाई होना मुश्किल माना जा रहा है। राज्य में इस वर्ष 1 करोड़ 36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वास्तविक बुआई हुई है। 26 जून तक महज 3 फीसदी बुआई हुई थी। इसके चलते मूंग और उड़द की बुआई करीब आधी रह गई।

इस बीच राज्य के जलाशयों में जलसंग्रहण भी इस महीने 58 फीसदी तक पहुंच गया था। बारिश ने करीब एक महीने तक कम-ज्यादा रूप में राज्य में अपनी मौजूदगी बनाए रखी। कुछ क्षेत्रों में अतिवृष्टि के कारण अंकुरित फसलों को भारी नुकसान भी हुआ लेकिन 1 से 31 अगस्त के दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश ने अचानक मुंह मोड़ लिया।

महीने के अंत तक बारिश की

यह कमी फसलों के लिए भारी पड़ने लगी। खानदेश में खरीफ सीजन पर संकट धुलिया, नंदुरबार और जलगांव इन 3 प्रमुख खानदेशी जिलों में पिछले 25 दिनों से बारिश नहीं हुई है। इससे करीब 14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की खरीफ फसलें संकट में हैं।

जलगांव में अगस्त के दौरान औसत की तुलना में 60 फीसदी, जबकि धुले और नंदुरबार में 50 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। इससे केला और प्याज उत्पादक किसान भी परेशान हैं।

50 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई

बारिश की कमी के बीच लगातार बादल छाये रहने से फसलों पर कीट और रोगों का प्रकोप भी बढ़ गया। इससे किसानों की उत्पादन लागत में भी काफी वृद्धि हुई है। अगस्त में पश्चिम विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश, पूर्व अहिल्यानगर तथा मध्य और उत्तर महाराष्ट्र के कुछ तहसीलों में फसल वृद्धि के लिए जरूरी बारिश नहीं हुई।

अगस्त के पहले सप्ताह से गायब हुई बारिश अब तक वापस नहीं लौटी है। इसका सबसे ज्यादा असर करीब 50 लाख हेक्टेयर में बोई गई सोयाबीन की फसल पर दिखाई दे रहा है। सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ गई है।

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विदर्भ में स्थिति गंभीर

महाराष्ट्र के विदर्भ में इस वर्ष खरीफ की कुल 50 लाख 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अगस्त के अंत तक बुआई हुई थी। यहां कपास, सोयाबीन, धान, मूंग, उड़द, ज्वार, मक्का और तुअर जैसी फसलें ली गई हैं। पूर्व विदर्भ के भंडारा, गोंदिया और गढ़चिरोली को छोड़कर शेष विदर्भ में अगस्त के दौरान बारिश ने लंबा ब्रेक लिया। इससे लगभग सभी प्रमुख फसलें संकट में आ गई हैं।

मराठवाड़ा में किसान चिंतित

महाराष्ट्र राज्य के मराठवाड़ा में इस साल 48 लाख 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई। कपास, सोयाबीन, बाजरा, मक्का, तुअर, मूंग और उड़द जैसी फसलें बोई गई है। मौजूदा स्थिति में सोयाबीन, तुअर और कपास की फसले मुरझाने लगी हैं। कीट और रोगों का प्रकोप भी बढ़ गया है। फसल हाथ से निकलने की आशंका के चलते किसानों की चिंता बढ़ गई है।

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