Nagpur Land Acquisition Court Order: नागपुर राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण और डिप्टी कलेक्टर को उस समय हाई कोर्ट की नाराजगी झेलनी पड़ गई, जब मुआवजे को लेकर जारी किए गए आदेशों का पालन नहीं किए जाने के कारण अवमानना का नोटिस जारी किया गया। हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के एक मामले में मुआवजा राशि और व्याज का भुगतान न करने पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ सख्त रुख अपनाया।
न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश सचिन देशमुख ने दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। मुआवजा और ब्याज की राशि नहीं मिलने के कारण विनोद मगनभाई पटेल और दिलीपभाई पोपटभाई पटेल द्वारा याचिका दायर की गई।
अदालत ने इससे पहले 3 जुलाई 2025 को एक आदेश जारी कर NHAI को निर्देश दिया था कि वह 8 सप्ताह के भीतर भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण के पास व्याज सहित मुआवजा राशि जमा करे। NHAI ने तय समय सीमा के भीतर इस आदेश का पालन नहीं किया।
इसके बजाय NHAI ने सुप्रीम कोर्ट के 25 मार्च 2026 के एक नए फैसले (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बनाम तरसेम सिंह, 2026 INSC 291) का हवाला देते हुए पुराने आदेश (3 जुलाई 2025) में संशोधन की मांग की।
अदालत ने NHAI के इस रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि विभाग अपनी ही गलतियों और देरी का फायदा उठाना चाहता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि 3 जुलाई 2025 का आदेश उस समय लागू कानून पर आधारित था, अदालत ने NHAI के वकील से सवाल किया कि यदि उन्होंने समय पर (8) सप्ताह के भीतर) आदेश का पालन कर लिया होता, तो क्या इस आदेश में संशोधन मांगने की कोई नौबत आती। जिसका उत्तर 'ना' में था।
सुनवाई के दौरान NHAI ने अदालत को बताया कि उन्होंने पुराने आदेश का पालन करते हुए दिसंबर 2025 में डिप्टी कलेक्टर के पास राशि जमा कर दी थी और 24 दिसंबर 2025 को याचिकाकर्ताओं को पैसा बांटने के लिए नोटिस भी जारी कर दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि नोटिस मिलने के बाद वे जनवरी 2026 में डिप्टी कलेक्टर के समक्ष उपस्थित हुए और दस्तावेजों का सत्यापन भी हो गया। इसके बावजूद डिप्टी कलेक्टर द्वारा अब तक मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया।
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इस पूरी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने माना कि पहला NHAI ने 8 सप्ताह में राशि जमा न करके आदेश का पालन नहीं किया और दूसरा, डिप्टी कलेक्टर ने मुआवजे की राशि का वितरण न करके आगे और लापरवाही की।