

Nagpur Encroachment Manish Nagar: नागपुर शहर के मुख्य इलाकों में से एक मनीषनगर क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या लगातार विकराल होती जा रही है। मुख्य मार्गों और सर्विस रोड पर अवैध ठेलों तथा फेरीवालों के बढ़ते कब्जे से यातायात व्यवस्था चरमरा गई है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। मनीषनगर अंडरपास से लेकर टी पॉइंट और वहां से बेसा तक अतिक्रमण की भरमार देखी जा सकती है लेकिन कार्रवाई में प्रशासन पूरी तरह से लाचार नजर आ रहा है।
स्थिति यह है कि करीब 3 किलोमीटर लंबे मार्ग पर सड़क की दोनों ओर अतिक्रमणकारियों ने स्थायी रूप से कब्जा जमा लिया है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार क्षेत्र में 500 से अधिक अवैध ठेले सड़क किनारे संचालित हो रहे हैं। शाम के समय इनकी संख्या और बढ़ जाती है जिससे सड़कें संकरी हो जाती हैं और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
प्रति दिन लगभग 2,000 से अधिक वाहन चालक जाम और अव्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि मनपा का अतिक्रमण निरोधक दस्ता लंबे समय से क्षेत्र में कार्रवाई के लिए नहीं पहुंचा है। अतिक्रमण के कारण पैदल चलने वालों को भी फुटपाथ से उतरकर सड़क पर चलना पड़ रहा है जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
व्यापारियों और स्थानीय रहवासियों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता के चलते अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। दिन-ब-दिन इनकी बढ़ती संख्या के चलते सड़कें संकरी हो गई है। इस कारण वाहन चालकों की दिक्कतें कई गुना बढ़ गई है।
पर्याप्त जगह नहीं मिल पाने के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग जाती है। हर शाम हजारों लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ता है। नागरिकों ने मनपा प्रशासन और यातायात विभाग से संयुक्त अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने तथा यातायात व्यवस्था सुधारने की मांग की है।
मनीषनगर इलाके में फुटपाथ नजर ही नहीं आते। यहां फुटपाथ की जगह केवल अवैध ठेलों का कब्जा देखा जा सकता है। इनमें खाद्य पदार्थों के ठेलों की संख्या सर्वाधिक हो गई है। इन ठेलों पर आने वाले ग्राहकों के वाहन सड़कों पर पार्क हो जाते हैं। कई बार 2 लेयर में पार्किंग देखी जा सकती है। यहां से गुजरना चुनौतीपूर्ण हो गया है। फुटपाथ पर ठेले और सड़कों पर खड़े वाहनों के कारण वाहन चालकों समेत पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।
बता दें कि जून माह खत्म होने को है। आगामी 30 जून से बच्चों के स्कूल शुरू हो जाएंगे। स्कूल खुलते ही स्कूली वाहनों की संख्या बढ़ जाएगी।
यहां कई स्कूल मौजूद है। ऐसे में स्कूल बसों, वैन और ऑटो की आवाजाही बढ़ेगी, तब अतिक्रमणकारियों के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या नासूर बन जाएगी। इस कारण बच्चों को भी स्कूल से घर पहुंचने में देरी होगी जिसका परिणाम कोचिंग सेंटर में भी पहुंचने में देरी से होगा।