Highlights
नागपुर जिले में सीमेंट सड़कों और बारिश के दौरान घरों में पानी जमा होने की समस्याओं को लेकर जनमंच ने जनहित याचिका दायर की।
हाई कोर्ट परिसर में पानी के रिसाव और जलभराव की समस्या सामने आई।
मनपा और लोक निर्माण विभाग (PWD) को सीवर लाइन की समस्या का संयुक्त निरीक्षण करने का आदेश दिया गया।
हलफनामे के अनुसार, गेट नंबर 6 और 7 के सामने की पुरानी सीवर लाइन चोक होने पर पानी वापस परिसर में लौट सकता है।
Nagpur Municipal Corporation Sewer Line: नागपुर जिले में सीमेंट की सड़कों और सड़कों के कारण नीचे गए घरों में बारिश के दौरान पानी जमा होने जैसी कई समस्याओं को लेकर जनमंच की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।
याचिका पर सुनवाई के समय भारी बारिश के दौरान न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे ने हाई कोर्ट परिसर में भी जलजमाव को लेकर मुद्दा उठाया गया था। इसी तरह से सीवर लाइन चोक होने की गंभीर समस्या का तत्काल संयुक्त निरीक्षण करने का आदेश मनपा और पीडब्ल्यूडी को दिया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे अधि। पीडब्ल्यू मिर्जा ने बताया कि 12 अक्टूबर के अदालती आदेश के अनुपालन में मनपा ने एक कार्यकारी अभियंता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया था।
इस नोडल अधिकारी के साथ 23 अक्टूबर को बैठक आयोजित की गई लेकिन उन्होंने अधीक्षक अभियंता और अन्य संबंधित विभागों के साथ संवाद स्थापित करने में असमर्थता जताई।
इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित विभागों को आपस में तालमेल और समन्वय बनाकर याचिका में उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को इस मामले को हलफनामे के जरिए रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश देते हुए 30 अक्टूबर तक का समय दिया है।
हलफनामे में कई खुलासे अतिरिक्त सरकारी वकील उके ने अदालत का ध्यान 21 सितंबर के आदेश और हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट की ओर आकर्षित किया। रिपोर्ट में बताया गया कि भारी बारिश के कारण हाई कोर्ट के उत्तर भवन में स्थित सरकारी वकील के कार्यालय और बीबी 1 चैंबर में पानी का रिसाव हुआ था।
इसके अलावा दक्षिण भवन में महिला शौचालय के रास्ते आंतरिक गलियारे में तथा मुख्य भवन के उप-रजिस्ट्रार कक्ष की फर्श से पानी रिसा था। अदालत के समक्ष प्रस्तुत हलफनामे में यह बात सामने आई कि गेट नंबर 6 और 7 के सामने महानगरपालिका द्वारा निर्मित पुरानी सीवर लाइन स्थित है।
यदि यह सीवर लाइन चोक हो जाती है तो हाई कोर्ट परिसर से निकलने वाला पानी वापस लौटकर हाई कोर्ट भवन के भूतल परिसर में भर जाता है। हलफनामे में मांग की गई कि मनपा को विशेष रूप से मानसून के दौरान इस सीवर लाइन के नियमित रखरखाव का निर्देश दिया जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया गया कि अनुचित रखरखाव के कारण क्षतिग्रस्त हुई पाइपलाइन की मरम्मत कर दी गई है।
इसके साथ ही वन रक्षक आवासों (फॉरेस्ट गार्ड क्वार्टर्स) के संबंध में वित्त विभाग ने संपूर्ण राज्य के लिए 128 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत कर दी है। कोर्ट ने अपेक्षा जताई कि वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अगले 3 सप्ताह के भीतर इस राशि के आवंटन पर उचित निर्णय लेंगे।