नल की प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स- सोशल मीडिया
नागपुर

नागपुर के नलों में कैसा पानी पहुंच रहा है? हाई कोर्ट ने बनाई 5 सदस्यीय समिति, 2 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

Nagpur High Court Water Quality: नागपुर में दूषित पानी की शिकायतों पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई है। यह समिति दो हफ्ते में अदालत को रिपोर्ट सौंपेगी।

प्रमोद यादव

Highlights

  • नागपुर की पेयजल व्यवस्था की जांच के लिए हाई कोर्ट ने पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति नियुक्त की।

  • समिति को दो सप्ताह के भीतर न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।

  • जांच में जलापूर्ति व्यवस्था, पानी की गुणवत्ता और नल कनेक्शनों की स्थिति देखी जाएगी।

  • ओसीडब्ल्यू ने हर महीने 1,500 से 1,700 पानी के नमूनों की जांच करने का दावा किया है।

  • कंपनी के अनुसार, यह संख्या निर्धारित मानक के मुकाबले लगभग पांच गुना है।

Nagpur Drinking Water Dispute: नागपुर शहर में पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता और दूषित पानी की शिकायतों को लेकर न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने शहर की जलापूर्ति व्यवस्था का निरीक्षण करने के लिए 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति नियुक्त की।

इस समिति को शहर में पानी की आपूर्ति, नल कनेक्शनों और अन्य आवश्यक पहलुओं की जांच कर 2 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

दूषित पानी की शिकायतों के बीच अदालत द्वारा विशेषज्ञ समिति गठित्त किए जाने से अब जलापूर्ति व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जांच का रास्ता खुला है। समिति के निरीक्षण और रिपोर्ट के आधार पर पानी की गुणवत्ता, वितरण व्यवस्था तथा शिकायतों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य सदस्यों का समावेश

हाई कोर्ट द्वारा गठित 5 सदस्यीय समिति में आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर साइंटिस्ट डॉ. पवन लाभशेटवार, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की पूर्व सहायक अभियंता डॉ. कल्पना भोडे, डॉ.कार्तिक बालसुंदरम, डॉ. अविनाश वासुदेव और अधिवक्ता रवि सन्याल शामिल हैं।

समिति शहर में पेयजल आपूर्ति की स्थिति, नल कनेक्शनों और अन्य जरूरी पहलुओं का निरीक्षण करेगी। अदालत ने इस कार्य के लिए 2 सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की है।

जलापूर्ति व्यवस्था का मूल्यांकन करते समय पानी की गुणवत्ता के साथ उसके वितरण और उपभोक्ताओं तक पहुंचने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। जल शुद्धिकरण संयंत्र से निकलने वाला पानी, वितरण पाइपलाइन, नल कनेक्शन और उपभोक्ताओं के यहां पहुंचने वाले पानी की स्थिति अलग-अलग स्तरों पर जांच का विषय हो सकती है।

मानकों से 5 गुना अधिक नमूनों की जांच का दावा

OCW कंपनी की दलील है कि इन आंकड़ों के बीच अंतर को समझे बिना पूरे शहर की जलापूर्ति को दूषित घोषित करना सही नहीं है। हालांकि इन दावों और शिकायतों की वास्तविक स्थिति का आकलन अब विशेषज्ञ समिति के निरीक्षण तथा उसकी रिपोर्ट के आधार पर किया जा सकेगा।

ओसीडब्ल्यू ने अदालत को बताया कि केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी संगठन (CPHEEO) के मानकों के अनुसार 30 लाख की आबादी के लिए हर महीने 300 पानी के नमूनों की जांच करना आवश्यक है।

कंपनी का दावा है कि इसके मुकाबले वह हर महीने लगभग 1,500 से 1,700 नमूनों की जांच करती है। कंपनी के अनुसार नमूनों की जांच की यह संख्या निर्धारित मानक से करीब 5 गुना अधिक है।

Jantar Mantar: जंतर-मंतर पर नहीं तो और कहां होगा प्रदर्शन? दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका, मंगलवार को सुनवाई

राहुल गांधी की याचिका में चौदह त्रुटि! कोर्ट ने 220 रुपये की कमी की ओर इशारा किया, आज भी कई याचिका पर सुनवाई

Weather Alert: दिल्ली-UP समेत 15 राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, जानें मौसम का हाल

भारत-पाक सीमा पर लैंडमाइन धमाका! चार आतंकियों के उड़े चिथड़े, घुसपैठ की कोशिश के दौरान ब्लास्ट

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 6 राज्यों में नियुक्त किए राज्यपाल, जानें किसे कहां मिली जिम्मेदारी