

Yavatmal Water Bill Dues To 120 Crores: जल मानव जीवन की सबसे आवश्यक बुनियादी जरूरतों में से एक है। इसके बिना दैनिक जीवन का कोई भी कार्य सुचारु रूप से पूरा नहीं हो सकता। इसके बावजूद यवतमाल शहर के अनेक नागरिक जलकर (वॉटर टैक्स) का भुगतान करने में घोर उदासीनता बरत रहे हैं। परिणामस्वरूप, शहर को जलापूर्ति करने वाले 'महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण' (मजीप्रा) पर आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। वर्तमान में शहर के 45 हजार से अधिक उपभोक्ताओं पर कुल 120 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया है, जिससे प्राधिकरण को विभिन्न विकास एवं रखरखाव (मेंटेनेंस) कार्यों में भारी वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यवतमाल शहर में सबसे अधिक बकाया घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं पर है। इस श्रेणी के 44 हजार 439 नल कनेक्शनधारकों पर 50 करोड़ 71 लाख 35 हजार 694 रुपये की मूल बकाया राशि है। इसके अलावा, बिल जमा करने में देरी के कारण विलंब शुल्क (डीपीसी) के रूप में 23 करोड़ 83 लाख 32 हजार 200 रुपये अलग से जोड़े गए हैं। इस प्रकार घरेलू उपभोक्ताओं की कुल बकाया राशि 74 करोड़ 54 लाख 67 हजार 894 रुपये तक पहुंच गई है।
वहीं, व्यावसायिक (कमर्शियल) श्रेणी के 509 उपभोक्ताओं पर 2 करोड़ 40 लाख 37 हजार 487 रुपये की मूल बकाया राशि है। इस पर 2 करोड़ 37 लाख 42 हजार 914 रुपये विलंब शुल्क लगाया गया है, जिससे इस श्रेणी की कुल बकाया राशि 4 करोड़ 77 लाख 80 हजार 401 रुपये हो गई है।
इसके अतिरिक्त, शहरी चैरिटी श्रेणी के 393 उपभोक्ताओं पर 27 करोड़ 14 लाख 29 हजार 706 रुपये की मूल बकाया राशि है। इस पर 14 करोड़ 49 लाख 74 हजार 436 रुपये डीपीसी जोड़ने के बाद कुल बकाया 41 करोड़ 64 लाख 4 हजार 142 रुपये हो गया है। इन तीनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 45 हजार 341 उपभोक्ताओं पर 120 करोड़ 96 लाख 52 हजार 437 रुपये की भारी-भरकम बकाया राशि निकल चुकी है।
महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (मजीप्रा) कार्यकारी अभियंता प्रफुल्ल व्यवहारे "लगातार बढ़ती बकाया राशि के कारण विभाग के सभी दैनिक और आर्थिक व्यवहार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। मजीप्रा द्वारा अब बड़े बकायादारों के विरुद्ध एक विशेष वसूली अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत डिफ़ॉल्टर्स को अंतिम नोटिस जारी करना, उनके नल कनेक्शन काटना तथा आवश्यकतानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।"