Highlights
अमर राठी को 2017 में निचली अदालत ने दोषी ठहराते हुए 15 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
जेल में बंद राठी ने MA पूरा करने के आधार पर 90 दिन की विशेष शैक्षिक छूट मांगी थी।
उन्होंने दिसंबर 2024 में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया था।
6 मई 2026 के नए सर्कुलर के आधार पर उनकी मांग खारिज कर दी गई थी।
हाई कोर्ट ने माना कि यह मामला 3 अक्टूबर 2019 के पुराने सर्कुलर के तहत आता है और शिक्षा के आधार पर 90 दिन की छूट देने का आदेश दिया।
POCSO Act Convict Education Remission: अमर राठी को वर्ष 2017 में निचली अदालत द्वारा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6, 10 और 12 तथा नौसेना अधिनियम, 1957 की धारा 77(2) और 51 के तहत दोषी ठहराया गया था जिसमें 15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।
इसके बाद से याचिकाकर्ता अमर राठी जेल में है। याचिकाकर्ता ने अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन (एमए) की पढ़ाई पूरी करने के लिए 90 दिनों की विशेष शैक्षिक छूट की मांग की।
उन्होंने अदालत को बताया कि उन्होंने दिसंबर 2024 में ही पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा कर लिया था जो कि विवादित सर्कुलर जारी होने से काफी पहले था। सुनवाई के बाद न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे ने शिक्षा आधारित विशेष छूट देने का आदेश जारी किया।
महाराष्ट्र राज्य सरकार की ओर से 3 अक्टूबर 2019 को एक सर्कुलर जारी किया था जिसमें शिक्षा के आधार पर छूट का स्पष्ट प्रावधान था। इसके तहत एस.एससी./एचएससी.(12वीं) पास करने पर 90 दिन की छूट, डिग्री कोर्स पूरा करने पर 90 दिन की छूट, पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने पर 90 दिन की छूट और एम.फिल/पीएच.डी./रिसर्च कोर्स पूरा करने पर अतिरिक्त 90 दिन की छूट देने का प्रावधान किया गया था।
किंतु 6 मई 2026 को एक नया सर्कुलर जारी किया गया जिसके आधार पर याचिकाकर्ता की शैक्षिक छूट की मांग को 12 मई 2026 को खारिज कर दिया गया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिकाकर्ता की पैरवी कर रही वकील कडू ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की छूट की मांग और पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने की तिथि दोनों ही नए सर्कुलर से पहले की है, इसलिए यह मामला पुराने सर्कुलर के दायरे में आता है जिसमें पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए 90 दिन की विशेष छूट का स्पष्ट प्रावधान है।
नए सर्कुलर के आधार पर उनकी मांग को खारिज करना गलत है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। सरकारी वकील ने इसका विरोध किया लेकिन उन्होंने भी यह स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता का आवेदन और पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा होना, दोनों नए सर्कुलर से पहले के हैं।
दोनों पक्षों की दलीलों के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का मामला पुराने सर्कुलर के तहत आता है क्योंकि उसका आवेदन और शैक्षणिक योग्यता दोनों ही नए सर्कुलर से पहले के हैं।