

Highlights
देश-दुनिया के कई हिस्सों में इन दिनों आपदा की मार
डिजास्टर रिस्क रिडक्शन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा
आपदा प्रबंधन के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता
सेंडाई में 'डिजास्टर रिस्क रिडक्शन' पर कार्यक्रम आयोजित हुआ था
Disaster Risk Reduction: देश और दुनिया के कई हिस्सों में लोगों पर आपदा की जबरदस्त मार दिखाई दे रही है। पड़ोसी देश नेपाल में लगातार बाढ़ ने लोगों के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। तो वहीं पनामा में भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। वहां की सरकार ने आपातकाल की घोषणा की है। हर साल आपदा से लाखों लोग प्रभावित होते हैं।
आपदा समाज की सच्चाई है और लोगों को इससे निपटने के लिए रास्ते भी तलाशने होते हैं। साल 1989 में डिजास्टर रिस्क रिडक्शन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस की शुरुआत हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने जोखिम के प्रति जागरूकता और आपदा को कम करने की वैश्विक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक दिन मनाने का आह्वान किया था।
हर साल 13 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इस दिन में यह देखा जाता है कि दुनिया भर के लोग और समुदाय किस तरह आपदाओं के असर को कम कर रहे हैं और अपने सामने आने वाले जोखिमों को नियंत्रित करने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ा रहे हैं।
2015 में जापान के सेंडाई में 'डिजास्टर रिस्क रिडक्शन' पर संयुक्त राष्ट्र के तीसरे विश्व सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया गया कि आपदाओं का सबसे बुरा असर स्थानीय स्तर पर होता है, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है और बड़ी सामाजिक व आर्थिक उथल-पुथल मच सकती है। अचानक आने वाली आपदाएं हर साल लाखों लोगों को विस्थापित कर देती हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण और गंभीर होने वाली कई आपदाओं का टिकाऊ विकास में निवेश और वांछित परिणामों पर नकारात्मक असर पड़ता है।
आपदा से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर ही क्षमताओं को तुरंत मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। डिजास्टर रिस्क रिडक्शन के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क आपदा जोखिम को कम करने के लिए जरूरी उपाय बताया है। यह फ्रेमवर्क प्राकृतिक खतरों के साथ-साथ पर्यावरणीय, तकनीकी और जैविक खतरों और जोखिमों के कारण होने वाली छोटी और बड़ी आपदाओं के जोखिम से निपटने के बारे में बताता है।
कई एजेंडों से मिलकर बना सेंडाई फ्रेमवर्क
सेंडाई फ्रेमवर्क में जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता, विकास के लिए वित्तपोषण पर अदीस अबाबा एक्शन एजेंडा, नया शहरी एजेंडा और सतत विकास लक्ष्य शामिल हैं।
2015 में आपदा जोखिम कम करने पर हुए तीसरे UN विश्व सम्मेलन के बाद UN महासभा द्वारा मंजूर किया गया सेंडाई फ्रेमवर्क में जरूरी कदम उठाने की बात करता है।
आपदा के जोखिम और उससे होने वाले नुकसान में बड़ी कमी लाना- चाहे वह नुकसान लोगों, व्यवसायों, समुदायों और देशों की जान-माल, आजीविका और स्वास्थ्य का हो, या फिर उनकी आर्थिक, भौतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संपत्तियों का।
फ्रेमवर्क के अनुसार आपदा जोखिम को कम करने में सरकार की मुख्य भूमिका होती है, लेकिन यह जिम्मेदारी स्थानीय सरकार, निजी क्षेत्र और अन्य संबंधित पक्षों के साथ भी साझा की जानी चाहिए।
सेंडाई फ्रेमवर्क में आपदा प्रबंधन को स्थानीय स्तर से पहल करने पर विशेष जोर दिया गया है। भारत में स्थानीय स्तर की सरकार चाहे ग्राम पंचायत हो, पंचायत समिति हो या जिला परिषद हो या फिर नगर पालिका। भारतीय संविधान में स्थान दी गई है। ताकि स्थानीय स्तर पर आपदा से निपटने के लिए सभी संस्था जरूरी कदम उठा सके।
ग्राम पंचायत की भूमिका
पंचायत स्थानीय लोगों को आपदा को लेकर जागरूक करती है और इससे बचाव के लिए प्रशिक्षण और वर्कशॉप का आयोजन करती है
आपदाओं से निपटने के लिए ग्रामीण स्तर पर योजना की तैयारी करती है और राहत कार्य के लिए जिला प्रशासन या तहसील की मदद से काम करती है।
पंचायत आपदा के समय प्रभावित लोगों को सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाने में मदद करती है और जरूरी मेडिकल सुविधा मुहैया कराती है।
आपदा के बाद प्रभावित लोगों को पुनर्वास में मदद करने का काम करती है और इसके लिए पुनर्निर्माण में सहयोग देना शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र के ताजा आंकड़े के अनुसार दुनिया भर में आपदा से निपटने की मिली-जुली स्थिति की ओर इशारा करते हैं। हालांकि इस दौरान मौतें कम करने, आपदा जोखिम से निपटने के सिस्टम को मजबूत करने और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम का दायरा बढ़ाने में खास तौर पर प्रगति देखी जा रही है। वहीं दूसरी ओर, प्रभावित लोगों की संख्या, आर्थिक नुकसान और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के रुझान बताते हैं कि अभी भी बड़ी चुनौती है।