मृत डॉक्टरों के डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग (सोर्स: गुगल जेमिनी)
नागपुर

मौत के बाद भी हस्ताक्षर करते रहे डॉक्टर, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट के आरोप से मचा हड़कंप, जानें क्या है पुरा मामला

Illegal Pathology Lab Fake Reports: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में खुलासा हुआ है कि महाराष्ट्र में मृत डॉक्टरों के डिजिटल साइन का उपयोग कर अवैध पैथोलॉजी लैब फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बांट रही हैं।

वेदांत जोशी

Digital Signature Doctors Scam: महाराष्ट्र में कथित अवैध पैथोलॉजी लैब के संचालन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता दिगंबर पचगाड़े ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ में जनहित याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान मेडिको-लीगल सोसाइटी ऑफ इंडिया के संस्थापक सदस्य डॉ. राजीव जोशी ने मध्यस्थता अर्जी दाखिल कर मेडिकल रिपोर्ट से जुड़े गंभीर आरोप अदालत के सामने रखे।

डॉ. जोशी ने दावा किया कि मृत डॉक्टरों के डिजिटल हस्ताक्षरों का कथित तौर पर दुरुपयोग कर मरीजों को फर्जी मेडिकल जांच रिपोर्ट जारी की जा रही हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि एक पैथोलॉजी लैब में लगातार तीन महीने तक इस तरह का कथित फर्जीवाड़ा चलता रहा।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने मध्यस्थता अर्जी को रिकॉर्ड पर लेते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

लैब संचालकों को डिजिटल हस्ताक्षर बेचने का आरोप

डॉ. जोशी के अनुसार, नियमानुसार पैथोलॉजी लैब चलाने के लिए संबंधित विशेषज्ञ योग्यता रखने वाले डॉक्टरों की आवश्यकता होती है। उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में ऐसी प्रयोगशालाएं संचालित हो रही हैं, जिनका संचालन कथित तौर पर डीएमएलटी और सीएमएलटी धारक तकनीशियन कर रहे हैं।

अर्जी में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ मान्यता प्राप्त डॉक्टरों ने अपने डिजिटल हस्ताक्षर लैब संचालकों को उपलब्ध कराए या बेचे। इसके बाद कथित तौर पर एक ही डॉक्टर के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल कई अलग-अलग लैबों से मेडिकल रिपोर्ट जारी करने में किया गया।

मरीजों की जान पर खतरे का मुद्दा

अदालत के समक्ष दलील दी गई कि यदि बिना उचित विशेषज्ञ जांच और सत्यापन के मेडिकल रिपोर्ट जारी की जा रही हैं, तो इससे मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

याचिका में कथित अवैध प्रयोगशालाओं और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। मामले में महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट, 1961 और भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई का मुद्दा भी अदालत के समक्ष उठाया गया।

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