नागपुर हाई कोर्ट,(सोर्स: सोशल मीडिया)  
नागपुर

अमरावती चोरी मामला: न्यायाधीशों के घरों में चोरी पर HC सख्त, सुरक्षा ऑडिट में गड़बड़ी पर राज्य से मांगा जवाब

Nagpur Security Audit Irregularities: अमरावती में न्यायाधीशों के घरों में चोरी पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। सुरक्षा ऑडिट की प्रक्रिया में गड़बड़ी पर सरकार से जवाब मांगा गया है।

अंकिता पटेल

Nagpur Court Staff Security Issue: अमरावती जिले के कांतानगर इलाके में न्यायाधीशों और न्यायालयीन कर्मचारियों के घरों में हुई चोरी की घटनाओं की उच्च न्यायालय ने गंभीरता से दखल ली है और स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। सोमवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई अदालत के निर्देशानुसार पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने न्यायाधीशों के बंगलों, न्यायालयीन कर्मचारियों के घरों और कार्यालयों के सुरक्षा ऑडिट का लेखा-जोखा अदालत के सामने प्रस्तुत किया।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने ऑडिट के लिए गठित समिति की चयन प्रक्रिया में भारी विसंगतियों पर आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने टिप्पणी की है कि ऑडिट समिति में कहीं तो सह-आयुक्त (जॉइंट कमिश्नर) स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया गया है, जबकि कहीं केवल न्यायालय के लिपिक (क्लर्क) का नाम दे दिया गया है जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

अमरावती में विशेष रूप से जजों के आवासों को बनाया था निशाना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अज्ञात चोरों ने अमरावती जिले के कांतानगर क्षेत्र को विशेष रूप से लक्ष्य बनाया या जहां उन्होंने न्यायाधीशों के निवासों के साथ-साथ न्यायालयीन कर्मचारियों के घरों में भी सेंधमारी की थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव और अन्य को प्रतिवादी बनाकर नोटिस जारी किया है, साथ ही अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि संबंधित दस्तावेज "न्याय मित्र' को सौंपे जाएं। इस याचिका में अदालत की सहायता के लिए एडवोकेट वेद देशपांडे को न्याय मित्र' नियुक्त किया गया।

चारों क्षेत्रों का सुरक्षा ऑडिट पूरा

सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित किया गया कि पुलिस महानिदेशक ने कोल्हापुर, मुंबई, गोवा और नागपुर इन चारों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले न्यायालयों, न्यायाधीशों के आवासों और कर्मचारियों के घरों का सुरक्षा ऑडिट पूरा कर लिया है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि अमरावती की घटना के बाद जैसे हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है उसी प्रकार की याचिकाएं औरंगाबाद और मुंबई खंडपीठ में भी प्रलंबित हैं। इतना ही नहीं, इससे पहले वर्ष 2021 में देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस तरह की घटनाओं का संज्ञान लिया।

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