बॉम्बे हाई कोर्ट का निर्देश, Khashaba Dadasaheb Jadhav को पद्म विभूषण पर 4 मई तक फैसला करे केंद्र

बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को पहलवान Khashaba Dadasaheb Jadhav को मरणोपरांत पद्म विभूषण देने पर 4 मई तक फैसला लेने का निर्देश दिया है। याचिका पर अगली सुनवाई 5 मई को होगी।
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खाशाबा जाधव पद्म विभूषण की मांग का मामला (सौ. सोशल मीडिया )
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Bombay High Court On Khashaba Dadasaheb Jadhav: बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता Khashaba Dadasaheb Jadhav को मरणोपरांत पद्म विभूषण देने के मुद्दे पर 4 मई 2026 तक निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस उपलब्धि को लेकर कोई विवाद नहीं है। न्यायमूर्ति माधव जामदार और प्रवीण पाटिल की खंडपीठ ने यह आदेश ‘कुश्ती वीर खाशाबा जाधव फाउंडेशन’ की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। इस फाउंडेशन की स्थापना उनके बेटे रणजीत जाधव ने की है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 5 मई तय की है।

भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता

Khashaba Dadasaheb Jadhav ने 1952 के Helsinki Olympics 1952 में कुश्ती में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था। वह भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता बने थे, जिससे देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ।

पद्म विभूषण की मांग पर पुनर्विचार

याचिका में गृह मंत्रालय से अपील की गई है कि वह जाधव को देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित करने के फैसले पर पुनर्विचार करे। अदालत ने केंद्र को तय समयसीमा में उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

पहले मिल चुका है अर्जुन पुरस्कार

गौरतलब है कि Khashaba Dadasaheb Jadhav का 1984 में निधन हो गया था। उन्हें 2001 में मरणोपरांत अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

फैसले पर टिकी निगाहें

अब केंद्र सरकार के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। अगर यह सम्मान दिया जाता है, तो यह देश के पहले ओलंपिक पदक विजेता के योगदान को एक बड़ी मान्यता होगी।

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