Mumbai Local Ticket Checking Drive (फोटो क्रेडिट-X) 
मुंबई

सावधान! मुंबई लोकल में AI से बना फर्जी टिकट लेकर चले तो जाएंगे जेल

Western Railway AI Fake Ticket: वेस्टर्न रेलवे ने AI की मदद से फर्जी टिकट बनाने और इस्तेमाल करने वालों पर सख्त रुख अपनाया है। बांद्रा में धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के बाद चेकिंग बढ़ा दी गई है।

अनिल सिंह

AI Fake Rail Ticket: मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में अब जालसाजों ने तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है, लेकिन वेस्टर्न रेलवे (Western Railway) भी इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। हाल ही में चर्चगेट-विरार उपनगरीय मार्ग पर टिकट चेकिंग के दौरान एआई (AI) की मदद से बनाई गई फर्जी डिजिटल टिकट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने ऐसे यात्रियों के खिलाफ न केवल भारी जुर्माना बल्कि सीधे पुलिस केस (FIR) दर्ज करने का सख्त आदेश जारी कर दिया है। तकनीक के इस दुरुपयोग ने रेलवे के राजस्व और सुरक्षा तंत्र को अलर्ट मोड पर डाल दिया है।

मुंबई लाइव की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांद्रा रेलवे पुलिस ने इस संबंध में एक मामला दर्ज किया है। इसमें उस यात्री और उसे फर्जी टिकट बनाने में मदद करने वाले व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। जांच में पाया गया कि ये लोग एआई टूल्स का उपयोग कर यूटीएस (UTS) ऐप जैसी दिखने वाली हूबहू फर्जी टिकटें तैयार कर रहे थे। रेलवे ने इसे गंभीर धोखाधड़ी माना है और स्पष्ट किया है कि भविष्य में पकड़े जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

बांद्रा पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी का मामला दर्ज

बांद्रा रेलवे पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर इस दिशा में पहली बड़ी कार्रवाई है। पुलिस उन गिरोहों की तलाश कर रही है जो मोबाइल ऐप्स और एआई के जरिए टिकट के फोंट, समय और क्यूआर कोड में हेरफेर कर यात्रियों को फर्जी टिकट उपलब्ध करा रहे हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल युग में लोग शॉर्टकट अपना रहे हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि रेलवे का सर्वर हर वैध टिकट का रियल-टाइम रिकॉर्ड रखता है। अब फर्जी टिकट पकड़े जाने पर केवल जुर्माना नहीं, बल्कि आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत जेल की सजा भी हो सकती है।

चेकिंग स्टाफ को दी जा रही है विशेष 'डिजिटल ट्रेनिंग'

जालसाजों की बढ़ती चतुराई को देखते हुए पश्चिम रेलवे के कार्यवाहक महाप्रबंधक प्रदीप कुमार ने बताया कि टिकट जांच कर्मचारियों (TTE) को अतिरिक्त और विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य हेरफेर किए गए डिजिटल टिकटों और असली टिकटों के बीच सूक्ष्म अंतर को पहचानना है। जांच अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल फिजिकल टिकट काउंटर से ली गई रसीद या आधिकारिक 'UTS App' के भीतर लाइव टिकट को ही स्वीकार करें। टिकट के स्क्रीनशॉट या गैलरी में रखे फोटो को अब वैध नहीं माना जाएगा।

यूटीएस ऐप और सुरक्षा के कड़े मानक

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत स्रोत से टिकट न खरीदें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल रेलवे काउंटर और आधिकारिक यूटीएस ऐप ही टिकट खरीदने के सुरक्षित माध्यम हैं। एआई-जनरेटेड टिकटों को पहचानने के लिए अब टीटीई के पास उपलब्ध हैंडहेल्ड मशीनों को भी अपडेट किया जा रहा है, जिससे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही उसकी वास्तविकता का तुरंत पता चल जाएगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि डिजिटल हेरफेर करना एक गंभीर अपराध है और यात्री अपनी सुविधा के लिए कानून को हाथ में न लें।

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