Mumbai Pise Panjrapur Underground Water Tunnel Project: मुंबई शहर की बढ़ती पानी की जरूरत और पुरानी पानी की पाइप लाइनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए पिसे से पांजरापूर के बीच आठ किमी लंबी भूमिगत जल सुरंग के निर्माण को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।
इस सुरंग से मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूती देने और भविष्य की बढ़ती पानी की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त वॉटर ट्रांसपोर्ट व्यवस्था तैयार करने का रास्ता साफ हुआ है।
राज्य सरकार ने परियोजना के दौरान इमारतों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, यातायात प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कड़े निर्देश भी दिए हैं। नगर विकास विभाग की ओर से सोमवार को जारी जीआर में बताया गया है कि पिसे से पांजरापूर के बीच 2235 मिलीमीटर व्यास की तीन और 3000 मिलीमीटर व्यास की एक सहित कुल चार पानी की पाइप लाइनों से जलापूर्ति की जाती है। ये पाइप लाइनें क्रमशः 1979, 1986, 1996 और 2007 में शुरू हुई थीं।
इनमें सबसे पुरानी पाइप लाइन 47 वर्ष पुरानी हो चुकी है। मौजूदा वॉटर ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की सीमाएं, भविष्य में पानी की बढ़ती मांग, अतिरिक्त पंपिंग केंद्र की जरूरत और पाइप लाइनों के आसपास जगह की कमी को देखते हुए नई भूमिगत सुरंग प्रस्तावित की गई है।
इस परियोजना से मुंबई शहर की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए भविष्य में अतिरिक्त ट्रांसपोर्टेशन क्षमता तैयार करने का विकल्प मिलेगा। हालांकि, जीआर में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सुरंग बनने के बाद प्रतिदिन कितने अतिरिक्त पानी की आपूर्ति होगी या पानी कटौती में कितनी कमी आएगी।
सुरंग निर्माण के दौरान आसपास की इमारतों और संरचनाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। खुदाई से पहले संबंधित क्षेत्र के भूगर्भ का विस्तृत अध्ययन करना होगा। उसी के आधार पर सुरंग खोदने वाली मशीन का चयन करना होगा। इसी के साथ ही पर्यावरण और अन्य संबंधित प्राधिकरणों से आवश्यक मंजूरियां लेना भी अनिवार्य होगा।
11 बारिश को देखते हुए निर्माण के मानसून के दौरान मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में होने वाली भारी दौरान और काम पूरा होने के बाद आपात स्थिति रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने होंगे। निर्माण से निकलने वाले ठोस कचरे का उचित और निर्धारित स्थान पर निपटारा करना होगा।
धूल प्रदूषण रोकने के लिए मुंबई महानगरपालिका के संबंधित निर्देशों का पालन करना होगा। निर्माण के दौरान ध्वनि प्रदूषण का स्तर 55 डेसीबल से कम रखना होगा। इसके लिए साइलेंसर, ध्वनि अवरोधक, गाद संभालने वाले वाहनों पर रबड़ की चटाई और हाइड्रॉलिक क्रेन जैसी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं।
खुदाई से यातायात पर पड़ने वाले असर का अध्ययन कर लोगों को होने वाली परेशानी कम करने के उपाय करने होंगे। यातायात से जुड़ी सभी आवश्यक मजूरिया भी लेनी होंगी। परियोजना के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी बीएमसी की होगी।