सार्वजनिक स्थानों पर कचरा डंपिंग पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त: BMC की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, तय होगी जवाबदेही

Bombay High Court: सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की समस्या पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को फटकार लगाई है। कोर्ट ने वार्ड स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
Bombay High Court takes a strict stance on waste management in Mumbai; directs BMC to take action at the ground level
बॉम्बे हाईकोर्ट, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Bombay High Court BMC Public Garbage Dumping Directives: सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कचरा प्रबंधन से संबंधित सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासन को खुले में कचरा डंपिंग रोकने के लिए प्रभावी और जमीनी स्तर पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

सिर्फ योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि शहर में खुले स्थानों पर कचरा जमा होने से रोकने के लिए केवल योजनाएं तैयार करना पर्याप्त नहीं है। इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना भी जरूरी है। अदालत ने कचरा प्रबंधन व्यवस्था की नियमित निगरानी और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने पर जोर दिया।

वार्ड स्तर पर तय हो जवाबदेही

अदालत ने निर्देश दिया कि जिन इलाकों से बार-बार कचरा जमा होने की शिकायतें सामने आती हैं, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। BMC को वार्ड स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट करने और कचरा प्रबंधन व्यवस्था की निगरानी मजबूत करने को कहा गया है।

कचरा फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के लिए पुलिस की सहायता लेने की बात भी अदालत ने कही है।

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ठोस कचरा प्रबंधन मजबूत करने पर जोर

अदालत ने मुंबई शहर की ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। प्रशासन को नियमित निरीक्षण के साथ उन स्थानों पर सुधारात्मक कदम उठाने होंगे, जहां बार-बार कचरा जमा होने की समस्या सामने आती है।

कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में देनी होगी

हाईकोर्ट ने प्रशासन से अब तक की गई कार्रवाई और उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलने से पर्यावरण और नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए प्रभावी निगरानी और कार्रवाई की आवश्यकता पर अदालत ने जोर दिया।

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