Uddhav Thackeray Emergency Meeting Matoshree: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़े उलटफेर की आहट सुनाई दे रही है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस समय ऑपरेशन टाइगर को लेकर जबरदस्त चर्चाएं गर्म हैं। खबर है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, उद्धव ठाकरे गुट के बचे हुए सांसदों में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। इस सनसनीखेज घटनाक्रम के बीच, उद्धव ठाकरे ने आगामी 14 जून को मातोश्री पर अपने सभी सांसदों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक बुलाई है।
पिछले कुछ दिनों से राज्य में ऑपरेशन टाइगर शब्द की गूंज सुनाई दे रही है। राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना, ठाकरे गुट के सांसदों को अपनी ओर खींचने की रणनीति पर काम कर रही है। शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि उद्धव गुट के कई सांसद उनके संपर्क में हैं और जल्द ही बड़ा राजनीतिक विस्फोट हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में हुई एक हालिया बैठक में उद्धव गुट के 9 में से 7 सांसदों की उपस्थिति होने का दावा भी किया जा रहा है, जिसने राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुँचा दिया है।
ऑपरेशन टाइगर की इस चर्चा में सबसे ज्यादा चर्चा परभणी के सांसद संजय उर्फ बंडू जाधव की हो रही है। खबरें हैं कि जाधव पिछले कुछ समय से एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और वे ठाकरे गुट की पिछली कुछ महत्वपूर्ण बैठकों से भी नदारद रहे हैं। इसी को देखते हुए ठाकरे गुट ने परभणी जिला संगठन में कुछ बड़े बदलाव भी किए हैं। इसके अलावा, कुछ अन्य सांसदों की गतिविधियों ने भी शक की सुई को घुमा दिया है
हालांकि, इन सभी सांसदों ने इन मुलाकातों को केवल अपने क्षेत्र के विकास कार्यों और फंड के संदर्भ में बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे बड़ी रणनीतिक चाल मान रहे हैं।
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अपने खेमे में मची इस हलचल को देखते हुए उद्धव ठाकरे अब पूरी तरह सावधान हो गए हैं। 14 जून को होने वाली इस बैठक में वे खुद सांसदों का मार्गदर्शन करेंगे और उन्हें एकजुट रहने का मंत्र देंगे। इस बैठक में परभणी के सांसद संजय जाधव शामिल होते हैं या नहीं, यह देखना सबसे दिलचस्प होगा।
महाराष्ट्र की राजनीति अब उस मोड़ पर पहुँच गई है जहाँ 14 जून की तारीख यह तय कर सकती है कि 'ऑपरेशन टाइगर' सफल होता है या उद्धव ठाकरे अपने 'शेरों' को बचा पाने में कामयाब रहते हैं। पूरे राज्य की नजरें अब 'मातोश्री' की उस दहलीज पर टिकी हैं, जहाँ से शिवसेना का भविष्य तय होना है।