

Waris Pathan On Sejal Pawar Dark Comedy: मुंबई के प्रतिष्ठित केईएम अस्पताल की एक मेडिकल छात्रा, सेजल पवार द्वारा 'डार्क कॉमेडी' के नाम पर मृत शरीरों (डेड बॉडीज) को लेकर की गई असंवेदनशील टिप्पणियों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने सरकार, मीडिया और कानून व्यवस्था पर "दोहरे मापदंड" अपनाने का आरोप लगाते हुए तीखा तंज कसा है। पठान का कहना है कि अगर इस मामले में आरोपी का नाम कोई मुस्लिम होता, तो अब तक देश का माहौल और प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह अलग होती।
वारिस पठान ने अपना कड़ा रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि चाहे वह डार्क कॉमेडी हो, स्टैंड-अप कॉमेडी हो या सॉफ्ट ह्यूमर, हर चीज की एक मर्यादा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी को भी ऐसी सीमा पार नहीं करनी चाहिए जिससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचे। सेजल पवार द्वारा मृत शरीरों के निजी अंगों को लेकर की गई टिप्पणियों को पठान ने बेहद निंदनीय बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह एक डॉक्टर नहीं, बल्कि केईएम अस्पताल की एमबीबीएस तीसरे वर्ष की छात्रा है और उसका ऐसा व्यवहार चिकित्सा जगत की गरिमा के खिलाफ है।
वारिस पठान ने इस विवाद को चुनिंदा न्याय का उदाहरण बताते हुए एक बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा, जरा कल्पना कीजिए, अगर सेजल पवार की जगह कोई ऐसी महिला होती जिसका नाम रिहाना, शबाना, आसिया या आयशा होता, तो क्या होता? पठान के अनुसार, यदि आरोपी मुस्लिम होती, तो अब तक पूरे मुस्लिम समुदाय को कटघरे में खड़ा कर दिया गया होता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब तक नेशनल टीवी पर डिबेट्स शुरू हो चुके होते और मीडिया ट्रायल के जरिए उसे 'देशद्रोही' या 'आतंकवादी' घोषित कर दिया गया होता।
वारिस पठान ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर आरोपी कोई मुस्लिम लड़की होती, तो पुलिस न केवल उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करती, बल्कि उसके परिवार वालों पर भी केस दर्ज हो जाते और शायद उसके घर पर 'बुलडोजर' भी चल चुका होता। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लोग ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं और जहां कोई मुसलमान दिखा, वे उन पर भेड़ियों की तरह टूट पड़ते हैं।
फिलहाल, इस मामले में सेजल पवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है और अस्पताल ने एक जांच समिति का भी गठन किया है। पठान ने यह भी दावा किया कि छात्रा ऐसी हरकतों की आदी है और उसने पहले भी इस तरह की चीजें की हैं। हालांकि छात्रा ने माफी मांग ली है, लेकिन वारिस पठान का कहना है कि संविधान सभी के लिए बराबरी की बात करता है। उन्होंने मीडिया की खामोशी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो मीडिया मुसलमानों के मामले में सक्रिय हो जाता है, वह अब चुप क्यों है?
यह मामला अब केवल एक छात्रा की 'असंवेदनशील कॉमेडी' तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने धर्म, न्याय और कानून के समान क्रियान्वयन पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।