MPSC पेपर लीक धांधली की जांच के लिए तुकाराम मुंढे नियुक्त हुए।
अधिकारियों की पोल खोलने के लिए 16 नवंबर तक मांगे गए हैं दस्तावेज।
क्या FDA की तरह इस मामले में भी होगी कोई कठोर कार्रवाई?
FDA Style Investigation In MPSC Case Tukaram Mundhe: अधिकारी तुकाराम मुंढे अपनी कड़ी कार्रवाई के लिए देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनका अब तक 25 बार तबादला हो चुका है। वे जहां-जहां भी गए, वहां उन्होंने अपनी सिंघम जैसी कार्यशैली का परिचय देते हुए भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के प्रत्येक मामले में कठोर कार्रवाई की।
MPSC पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों को लेकर पुणे में लंबे आंदोलन के बाद एक जांच समिति गठित की गई। छात्रों ने इस जांच समिति के सचिव के रूप में तुकाराम मुंढे को नियुक्त करने की मांग की थी, जिसे बाद में स्वीकार कर लिया गया। अब सचिव बनने के बाद तुकाराम मुंढे ने अपना पहला आदेश जारी कर दिया है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या तुकाराम मुंढे MPSC मामले में भी FDA की तर्ज पर कठोर कार्रवाई करेंगे? क्या जांच पारदर्शी होगी और दोषियों को कठोरतम सजा मिलेगी? क्या सभी आरोपियों पर, चाहे वे किसी नेता या वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े हों, मुंढे का चाबुक चलेगा?
छात्रों ने बड़ी उम्मीद के साथ तुकाराम मुंढे और उनकी कार्यशैली पर भरोसा जताया है। पूरे महाराष्ट्र में चर्चा है कि तुकाराम मुंढे इस मामले की जड़ तक पहुंचेंगे और इस समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।
तुकाराम मुंढे ने जब से महाराष्ट्र राज्य के FDA आयुक्त का पदभार संभाला है, तब से उन्होंने मिलावटखोरों और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ा शिकंजा कसा है। अब MPSC परीक्षा में धांधली के मामले में भी पूरे महाराष्ट्र के युवा तुकाराम मुंढे से इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
MPSC द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र या उत्तरतालिका लीक होने के कथित मामलों की जांच के लिए गठित जांच समिति ने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस जांच समिति के सदस्य-सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अभ्यर्थियों, विद्यार्थियों, आम नागरिकों और संबंधित पंजीकृत संस्थाओं से एक महत्वपूर्ण अपील की है।
उन्होंने आग्रह किया है कि इस प्रकरण से संबंधित जानकारी, शिकायतें, निवेदन और प्रासंगिक साक्ष्य-दस्तावेज 16 नवंबर तक एफिडेविट के साथ समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।