उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

Thane Municipal Election: ठाणे में शिंदे शिवसेना का परचम, उद्धव गुट दहाई भी नहीं छू सका

Maharashtra Local Body Election: ठाणे मनपा चुनाव 2026 में शिंदे की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उद्धव गुट दहाई का आंकड़ा नहीं छू सका और मेयर पद शिंदे सेना का तय माना जा रहा है।

अपूर्वा नायक

Thane Election Result News In Hindi: ठाणे की 131 सीटों वाली नगर महापालिका ने 2026 चुनाव में शिंदे की शिवसेना को सर्वाधिक सीटें दी हैं। बीते तीन दशकों से अविभाजित शिवसेना का गढ़ रहे टीएमसी में शिवसेना (उद्धव) दहाई के अंकों तक पहुंचने में नाकाम रही है। हालांकि बाला साहेब ठाकरे के दौर में भी यहां आनंद दिघे का ही राज चला।

दिवंगत शिवसेना नेता आनंद दिघे के समय से ही ठाणे शिवसेना का मजबूत गढ़ है। सिर्फ 1987 से 1993 तक कांग्रेस ने यहां सत्ता संभाली थी। उसके बाद से यहां शिवसेना का दबदबा बना हुआ है।

इस बार चुनाव रोचक इसलिए था, क्योंकि ठाकरे बंधु यानी उद्धव और राज एक साथ आए थे और मराठी मानुष का असली वारिस के तौर पर मैदान में अस्मिता और विरासत का नारा बुलंद कर रहे थे।

आलम यह है कि उद्धव सेना दहाई का अंक नहीं पार कर सकी है। कांग्रेस भी अपना खाता खोलने के लिए जद्दोजेहद करती नजर आई। हालांकि शिंदे सेना को एक बड़ा झटका लगा है।

शिवसेना की कई सीटों पर निर्विरोध जीत

महायुति ने प्रमुख वार्डों में लगातार निर्विरोध जीत हासिल करके अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। कई उम्मीदवार प्रतिद्वंद्वी पाटी के उम्मीदवारों और निर्दलीय उम्मीदवारों के नाम वापस लेने या अयोग्य होने के बाद निर्विरोध चुने गए। वार्ड नंबर 18 में शिवसेना के उम्मीदवार जयश्री रविंद्र फाटक, सुखदा संजय मोरे और राम रेपाले निर्विरोध चुने गए, वार्ड नंबर 18बी में जयश्री रविंद्र फाटक बिना किसी मुकाबले के विजयी हुई। वार्ड नंबर 18सी पर खास ध्यान गया, जहां शिवसेना (शिंदे गुट) के सचिव संजय मोरे की पत्नी सुखदा मोरे ने निर्विरोध जीत हासिल की।

शिंदे गुट का होगा मेयर

तय है कि अगला मेयर शिंदे सेना से होगा। चुनाव के नतीजे न केवल ठाणे शहर, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक लिटमस टेस्ट साबित होने वाले रहे। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का 'होम ग्राउंड' माने जाने वाले ठाणे में इस बार साख की लड़ाई थी।

जीत के मायने

  • डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उद्धव गुट को एकल अंकों तक रोक और मनसे का खाता भी नहीं खुलने देकर एक तीर से कई निशाने साधे है। एक तो उन्होंने खुद को ठाणे का 'किंग' साबित किया है। दूसरे अविभाजित शिवसेना का गढ़ रहे ठाणे में ठाकरे ब्रांड को लगभग हाशिये पर ला खुद को राजनीतिक तौर पर बाला साहेब ठाकरे का 'उत्तराधिकारी' साबित कर दिया है।
  • डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के सुपुत्र और सासद श्रीकांत शिंदे पर अब शिंदे सेना के गढ़ को और मजबूत बनाने की जिम्मेदारी आ गई है। ठाणे में पार्टी को संगठन और राजनीतिक दल के रूप में दशा-दिशा देने का काम उन्हें अच्छे से करना होगा।
  • ठाणे में शिंदे वर्चस्व को कड़ी चुनौती का नाम है वन मंत्री गणेश नाईक। इस क्षेत्र में नाईक की सक्रियता शिवसेना को चुभ रही है। इसकी वजह यह है कि ठाणे शहर में शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना मजबूत है, जबकि ठाणे ग्रामीण में बीजेपी की स्थिति अच्छी है।
  • लातूर नगर निगम में कांग्रेस की जीत का श्रेय भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण को दिया जा सकता है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे विलासराव देशमुख पर उनकी टिप्पणी ने जबर्दस्त तूफान पैदा किया। इसका खामियाजा उन्हें निकट भविष्य में भुगतना पड़ सकता है।
  • एनसीपी शरद पवार गुट के विधायक जितेंद्रआव्हाण के लिए समय चुनौतीभरा हो गया है।

ठाणे से नवभारत लाइव के लिए निहार रंजन सक्सेना की रिपोर्ट

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