भिवंडी के शांतिसागर कॉम्प्लेक्स में दूषित पानी का मामला (सोर्स: AI)
मुंबई

ठाणे के भिवंडी में दूषित पानी पर NGT सख्त, MPCB-CPCB और कलेक्टर की संयुक्त समिति करेगी जांच

Thane Contaminated Water Case: ठाणे के भिवंडी में पेयजल पाइपलाइन में सीवेज मिलने के आरोप पर NGT ने MPCB, CPCB और कलेक्टर की संयुक्त समिति बनाकर एक माह में जांच रिपोर्ट मांगी है।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आलोक उमाकृष्ण

NGT Orders Joint Probe Bhiwandi: ठाणे जिले के भिवंडी शहर में दूषित पेयजल आपूर्ति के गंभीर मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की पुणे स्थित पश्चिमी क्षेत्र खंडपीठ ने भिवंडी मनपा को भी नोटिस जारी करते हुए अहम निर्देश जारी किए हैं।

क्या है मामला?

यह मामला भिवंडी निजामपुर शहर मनपा (BNCMC) की जलापूर्ति लाइन में सीवेज और दूषित पानी के कथित मिश्रण से जुड़ा है। इस मामले में सोसायटी की ओर से आवेदक एड आर.आर.त्रिपाठी ने एनजीटी के समक्ष तथ्यों को रखा।

सोसाइटी का आरोप है कि इमारत के पीछे स्थित मुख्य पेयजल पाइपलाइन जर्जर और सड़ चुकी है। इसके चलते सीवेज का पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल रहा है, जिससे सोसाइटी में रहने वाले 32 परिवारों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

सुनवाई के दौरान आवेदक एड आर.आर. त्रिपाठी की ओर से मनपा के उप अभियंता (जल आपूर्ति विभाग) द्वारा 13 मई 2026 को सोसाइटी को भेजे गए पत्र का हवाला दिया गया।

लिखित शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

पत्र में इमारत की ड्रेनेज और वर्षा जल निकासी व्यवस्था में खामियों के कारण सीवेज के ओवरफ्लो होने, दुर्गंध फैलने तथा मनपा की जलापूर्ति पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने से दूषित पानी की शिकायतों का उल्लेख किया गया था।

यह भी कहा गया कि उक्त गंभीर समस्या को लेकर भिवंडी मनपा के संबंधित विभाग से लिखित शिकायत के बावजूद जरूरी कार्रवाई नहीं की गई।

समिति गठित कर जांच का आदेश

ठाणे शहर के शांतिसागर कॉम्प्लेक्स ‘एफ’ विंग को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड की ओर से एड त्रिपाठी द्वारा दायर मूल आवेदन पर सुनवाई करते हुए अधिकरण के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य डॉ. सुजीत कुमार वाजपेयी ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और जिला कलेक्टर के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति गठित करने का आदेश दिया है।

समिति को मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच कर एक माह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। NGT ने पाया कि विवाद का मूल कारण स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र संयुक्त जांच आवश्यक है।

समिति में MPCB, CPCB और जिला कलेक्टर के एक-एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। MPCB को समिति की नोडल एजेंसी बनाया गया है और उसे समन्वय तथा लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

आवेदक को निर्देश

अधिकरण ने आवेदक को भी निर्देश दिया है कि वह तीन दिनों के भीतर समिति के सदस्यों को आवश्यक दस्तावेज और आवेदन की प्रति उपलब्ध कराए। वहीं, 13 मई के भिवंडी मनपा के पत्र पर सोसाइटी की ओर से दिए गए जवाब को रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।

मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को होगी। NGT ने आदेश की प्रति समिति को तत्काल अनुपालन के लिए भेजने के निर्देश भी दिए हैं।

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