Sunflower Oil Prices In India: भारत में खाद्य तेलों की कीमतों और आयात के समीकरण पर रूस-यूक्रेन युद्ध का असर लगातार दिखाई दे रहा है। काला सागर क्षेत्र में समुद्री मार्ग प्रभावित होने से रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में भारत के लिए लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटीना सूरजमुखी तेल की आपूर्ति के प्रमुख स्रोत के रूप में उभर रहा है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार द्वारा खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में की गई कटौती से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति और घरेलू कीमतों पर नए समीकरण बनने की संभावना है।
कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेशभाई ठक्कर के अनुसार, भारत परंपरागत रूप से यूक्रेन, रूस और अर्जेंटीना से बड़ी मात्रा में सूरजमुखी तेल आयात करता रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण आपूर्ति प्रभावित होने से आयातकों को वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, चालू मार्केटिंग सीजन में नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच रूस से भारत ने करीब 12.20 लाख टन सूरजमुखी तेल आयात किया। यह 2024-25 की समान अवधि के मुकाबले लगभग 14 प्रतिशत कम है। रूस और यूक्रेन से मिलने वाला सूरजमुखी तेल अपेक्षाकृत सस्ता रहा है, इसलिए वहां से नियमित आपूर्ति भारत के लिए महत्वपूर्ण रही है।
केंद्र सरकार ने क्रूड पाम तेल और क्रूड सोयाबीन तेल पर मूल आयात शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। वहीं रिफाइंड सोयाबीन तेल तथा आरबीडी पाम तेल/सोयाबीन पर आयात शुल्क 32.5 प्रतिशत से घटाकर 27.5 प्रतिशत किया गया है। यह बदलाव 24 सितंबर 2026 से प्रभावी है। हालांकि शुल्क कटौती सीधे सूरजमुखी तेल पर नहीं हुई है, लेकिन पाम और सोयाबीन तेल की आयात लागत घटने से घरेलू खाद्य तेल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इसका असर सूरजमुखी तेल की कीमतों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है।
भारत में हर वर्ष करीब 25 से 35 लाख टन सूरजमुखी तेल आयात होता है। पाम और सोयाबीन तेल के बाद यह देश में सबसे अधिक आयात होने वाला खाद्य तेल है। ऐसे में रूस से घटती आपूर्ति और अर्जेंटीना पर बढ़ती निर्भरता के बीच आने वाले समय में सूरजमुखी तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति, आयात लागत और घरेलू मांग पर निर्भर करेंगे।