Sunetra Pawar oath (सोर्सः सोशल मीडिया) 
मुंबई

बदली-बदली महाराष्ट्र की राजनीति से शिंदे के मंसूबों पर फिरा पानी, देवेंद्र हुए और मजबूत

Shinde Setback: अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आया, जिससे एकनाथ शिंदे को झटका और मुख्यमंत्री की स्थिति और मजबूत हुई है।

आंचल लोखंडे

Maharashtra Political Upheaval: राकां नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में दर्दनाक मौत के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने शनिवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, अजीत के निधन के चौथे ही दिन हुए इस शपथ ग्रहण को लेकर जहां कई सवाल उठ रहे हैं, वहीं भाजपा और अजित पवार गुट के कुछ प्रमुख नेताओं की भूमिका पर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजित की चिता की आग ठंडी होने से पहले संपन्न हुए इस शपथ ग्रहण समारोह ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के मंसूबों पर पानी फेर दिया है और इससे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की स्थिति और मजबूत हुई है।

कम हुई शिंदे गुट की बार्गेनिंग पावर

महायुति सरकार में भाजपा स्वयं को सबसे बड़ा घटक मानती रही है, लेकिन शिंदे गुट की शिवसेना कभी भी खुद को छोटा मानने को तैयार नहीं हुई। गठबंधन में तीसरे दल के रूप में राकां (अजीत पवार गुट) के शामिल होने के बाद शिंदे गुट की बार्गेनिंग पावर कम हुई, फिर भी भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच शक्ति संतुलन को लेकर टकराव जारी रहा। महायुति सरकार 2.0 के बीते करीब 13 महीनों में यह कई बार देखने को मिला है। स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान जब भाजपा और शिंदे गुट ने राकां को गठबंधन से बाहर किया, तब अजीत और शरद पवार की राकां के फिर से एक होने की अटकलें तेज हुईं और शिंदे गुट उत्साहित नजर आया। लेकिन अजीत पवार के निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली, जिससे डीसीएम शिंदे के राजनीतिक मंसूबों को झटका लगा है।

भाजपा ने क्यों चला दांव?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व नहीं चाहता था कि राकां की कमान दोबारा शरद पवार के हाथों में जाए। खासकर मुंबई महानगरपालिका सहित अन्य निकायों में महापौर चुनाव से पहले अजीत पवार गुट की राकां का महायुति में बने रहना शिंदे गुट की बार्गेनिंग पावर को और कमजोर करता है। राकां में बगावत के दौरान अजित पवार का साथ देने वाले कई नेताओं को आशंका है कि यदि पार्टी की कमान शरद पवार के पास लौटती है, तो उनका राजनीतिक कद घट सकता है और उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। इसी डर के चलते, भाजपा के साथ मिलकर सुनेत्रा पवार को अस्थि विसर्जन के तुरंत बाद उपमुख्यमंत्री पद पर बैठाया गया, ऐसा आरोप लगाया जा रहा है।

भाजपा पर बड़ी साजिश का आरोप

अजित पवार की कट्टर विरोधी रहीं सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने कहा कि सत्ता और स्वार्थ ही अब राजनीति का एकमात्र सत्य बन गए हैं। उन्होंने कहा, “अजीत के खिलाफ 15 वर्षों तक लड़ाई लड़ने के बावजूद मुझे यह घटनाक्रम बेहद चुभ रहा है। तीन दिनों में अस्थि विसर्जन कर मुंबई लौट जाना और फिर शपथ ग्रहण होना, यह दर्शाता है कि सत्ता के आगे भावनाओं का कोई महत्व नहीं रहा।” उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा की सत्ता को केंद्र में रखने की रणनीति है, जो राकां और शिंदे गुट दोनों को कमजोर करना चाहती है।

संजय शिरसाट की आलोचना

शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय शिरसाट ने कहा, “मैंने नहीं सोचा था कि अजित पवार की मौत के बाद राजनीति में इतनी जल्दी इतना कुछ होगा। अस्थि विसर्जन के बाद सुनेत्रा का मुंबई जाना और नेताओं की बयानबाजी ठीक नहीं है। लगता है कि कुर्सी इंसान से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।”

राज ठाकरे का प्रफुल्ल पटेल पर निशाना

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा, “राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसी मराठी मिट्टी से उपजी पार्टी का अध्यक्ष एक मराठी और पाटिल होना चाहिए, न कि पटेल।”

एड. असीम सरोदे की एक्स पोस्ट

वरिष्ठ अधिवक्ता असीम सरोदे ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि “क्या महाराष्ट्र में भाजपा की दो राजनीतिक पार्टियां हैं। अमित शाह की शिंदे सेना और देवेंद्र फडणवीस की राकां?” उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता की चाह में दोनों राकां गुटों के विलीनीकरण को रोका गया और अंततः राकां भाजपा को ‘उपहार’ स्वरूप दे दी गई। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह खुशी की बात है कि महाराष्ट्र को पहली महिला उपमुख्यमंत्री मिली है और उम्मीद जताई कि सुनेत्रा पवार राजनीति में पारदर्शिता और संवेदनशीलता लेकर आएंगी।

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