Shiv Sena Bow Arrow Symbol Row: शिवसेना पार्टी के नाम व चिन्ह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के वकीलों के बीच जोरदार बहस चल रही है। बुधवार को ठाकरे गुट के सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने दमदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि शिवसेना विवाद पर केंद्रीय चुनाव आयोग व महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष का फैसला एकतरफा है। सिब्बल ने तत्काल प्रभाव से शिवसेना के चुनाव चिन्ह धनुष-बाण को फ्रीज करने की भी मांग की। इसके बाद ठाकरे गुट की तरफ से सीनियर वकील देवदत्त कामत ने भी शिवसेना विवाद को लेकर लिए गए फैसले पर सवाल खड़े किए।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने ठाकरे के वकीलों से गंभीर सवाल करते हुए पूछा कि क्या हम इन दलीलों के आधार पर शिंदे को अपात्र घोषित कर सकते हैं? क्या हम उन्हें सजा दे सकते हैं? बागची के इस सवाल से सुनवाई ने नया मोड़ ले लिया है। ठाकरे गुट के वकील कामत ने कहा कि चुनाव आयोग सिर्फ एक प्राधिकरण है। वह सिर्फ जो अधिकार दिए गए हैं, उसके हिसाब से फैसले ले सकता है। वह खुद से पार्टी के अस्तित्व को लेकर फैसला नहीं ले सकता है लेकिन शिवसेना विवाद में चुनाव आयोग ने अपने तरीके से फैसला लिया जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। अगर ट्रिब्यूनल ने गैर-कानूनी तरीके से काम किया है तो हमारे जज इसे ज्यूडिशियल रिव्यू के जरिए ठीक कर सकते हैं।
उद्धव गुट की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि यदि विधायकों को अपात्र घोषित करने के बारे में लिया गया पुराना फैसला गलत साबित होता है तो जाहिर तौर से इसका असर शिंदे गुट को असली शिवसेना मानने और उन्हें चुनाव चिन्ह देने के फैसले पर भी पड़ेगा। इसलिए हमारी मांग है कि फैसला होने तक धनुष-बाण को फ्रीज किया जाना चाहिए।
ठाकरे गुट के वकीलों ने कहा कि विस अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बागी विधायकों की अपात्रता के बारे में गलत फैसला लिया। विधायक दल और राजनीतिक पार्टी अलग-अलग होते हैं। किसी भी चुनाव में उम्मीदवार कौन होगा, यह राजनीतिक दल तय करता है। इसलिए जब बगावत हुई तो पार्टी का नेतृत्व किसके पास था। यह देखना बहुत जरूरी है। सबसे जरूरी बात यह कि उस समय शिवसेना का नेतृत्व कर रहे उद्धव ठाकरे ने शिंदे को विधायक दल के नेता पद से हटा दिया था। जब शिंदे पार्टी में नहीं थे तो इसके लिए दावा कैसे कर सकते हैं।
नार्वेकर ने कहा कि मैंने सभी निर्णय संविधान की दसवीं अनुसूची, नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत लिए है। मेरा फैसला पूरी तरह कानूनी और न्यायसंगत है, जो सुको द्वारा तय 'ट्रिपल टेस्ट' (संगठन, संविधान और बहुमत) पर आधारित था। सिब्बल ठाकरे गुट के वकील है जाहिर तौर पर वे मेरे फैसले पर सवाल खड़े करेंगे।
उद्धव गुट के प्रवक्ता संजय राऊत ने न्याय व्यवस्था व चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे और सत्ता के बल पर फैसले खरीदे जा रहे है तथा मूल पार्टी व उसका विहह्न धन के प्रभाव में दूसरों को सौंप दिया गया है। शिवसेना पार्टी और उसका चुनाव चिह्न हजारों करोड़ रुपये के सौदे के तहत छीना गया और बेचा गया।
स्पीकर कोई गलत फैसला लेता है तो अदालत को देखने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या अदालत खुद स्पीकर की तरह फैसला लेकर विधायकों को अयोग्य ठहराने का कदम उठा सकती है?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधानसभा अध्यक्ष का कोई भी फैसला यदि कानून की कसौटी पर गलत या अवैध पाया जाता है तो अदालत के पास उसके न्यायिक पुनरावलोकन और उसे सुधारने या रद्द करने का अधिकार है।