शिवसेना नाम और धनुष-बाण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, उद्धव गुट की तरफ से पक्ष रखेंगे कपिल सिब्बल

Shiv Sena Symbol Row: शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न 'धनुष-बाण' को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल अपनी दलीलें पेश करेंगे।
Supreme Court hearing today on the Shiv Sena name and 'Bow and Arrow' symbol
एकनाथ शिंदे, उद्धव ठाकरेसोर्स- सोशल मीडिया
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Supreme Court Hearing Shiv Sena: शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ को लेकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी है। मामले की लगातार सुनवाई के बीच आज 18 अगस्त को अदालत में उद्धव ठाकरे गुट यानी शिवसेना (यूबीटी) की ओर से दलीलें रखी जाएंगी।

कपिल सिब्बल रखेंगे UBT का पक्ष

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल उद्धव ठाकरे गुट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रख रहे हैं। ठाकरे गुट का कहना है कि चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को असली शिवसेना मानते हुए जो फैसला दिया था, वह गलत है। इसी फैसले को चुनौती देते हुए यूबीटी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

दलबदल कानून पर सिब्बल की दलील

यूबीटी की ओर से दलील दी गई है कि संविधान और दलबदल विरोधी कानून की ऐसी व्याख्या नहीं की जानी चाहिए, जिससे दल-बदल को बढ़ावा मिले। ठाकरे गुट का जोर इस बात पर है कि राजनीतिक दल की पहचान केवल विधायक दल की संख्या के आधार पर तय नहीं की जा सकती।

विधायक दल और मूल संगठन के अधिकार पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में विधायक दल की संख्या और मूल राजनीतिक संगठन के अधिकारों के बीच संतुलन के मुद्दे पर भी विचार कर रहा है। अदालत के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल है कि किसी राजनीतिक दल पर अधिकार तय करते समय निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या और पार्टी के मूल संगठन की भूमिका को किस तरह देखा जाए।

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6 सांसदों के मामले में भी सुनवाई

शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने को मंजूरी देने के लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को भी चुनौती दी गई है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दो सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दी है।

दोनों गुटों के लिए अहम कानूनी लड़ाई

शिवसेना के नाम, चुनाव चिह्न और पार्टी पर अधिकार से जुड़ा यह मामला उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे दोनों गुटों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान संविधान, दलबदल विरोधी कानून और राजनीतिक संगठन के अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर दलीलें रखी जा रही हैं।

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