राज ठाकरे ने केंद्र सरकार और अमित शाह पर तीखा हमला बोला है।
ठाकरे ने कहा कि मोदी और शाह के मन और मस्तिष्क में तानाशाही भरी हुई है।
राज ठाकरे ने कहा कि अमित शाह तानाशाह कैसे बनें डॉक्यूमेंट्री देख रहे हैं।
Raj Thackeray Slams Amit Shah: मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दोनों के मन और मस्तिष्क में चरम तानाशाही भरी हुई है। उन्होंने कहा कि इस तानाशाही के बल पर देश की संस्थाओं पर कब्ज़ा करके सत्ता पाई गई है, जिसे केवल चंद उद्योगपतियों के लाभ के लिए चलाया जा रहा है।
राज ठाकरे ने चेताया कि सत्ता के घमंड के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले आंदोलनों को कुचले जाने पर इस निरंकुश शासन को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।
3 अक्टूबर से दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर जारी प्रदर्शनों पर राज ठाकरे ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन दबाने के लिए दिल्ली में मेट्रो बंद की गई, रास्ते रोके गए, इंटरनेट व बस सेवा ठप की गई और आंदोलनकारियों को विमानों से उतारा गया।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन कवर कर रही महिला पत्रकारों का भी पुलिस द्वारा उत्पीड़न किया गया। संविधान के अनुच्छेद 19(1)(A) व (B) का हवाला देकर उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिक अधिकार है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के इस सवाल को याद दिलाया कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल क्यों हो रहा है?
ज्ञानेश कुमार के प्रति सरकार के बचाव पर सवाल उठाते हुए राज ठाकरे ने पूछा कि क्या चुनाव अधिकारी सत्ता हथियाने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है तो पारदर्शी चुनाव की मांग में क्या ग़लत है? क्या नेतृत्व को डर है कि ज्ञानेश कुमार के हटने से वोट चोरी के असली संरक्षकों का पर्दाफ़ाश हो जाएगा?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा कराने वाले युवाओं के आक्रोश और अन्ना आंदोलन का ज़िक्र कर राज ठाकरे ने सरकार को दोहरा बताया। उन्होंने तंज़ कसा कि अमित शाह नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री How To Become A Tyrant (तानाशाह कैसे बनें) रोज देख रहे हैं, जबकि उन्हें महात्मा गांधी से अहिंसा सीखनी चाहिए।
डॉ. आंबेडकर के 1949 के वक्तव्य का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि अंधी भक्ति के लिए स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की बलि नहीं दी जा सकती। उन्होंने चेताया कि सत्ता का अमरपट्टा कोई लेकर नहीं आया; जिस देश ने मुग़लों, पुर्तगालियों और अंग्रेज़ों का घमंड तोड़ा, वह अपनों की तानाशाही भी सहन नहीं करेगा।