गारगई डैम (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

मुंबई की बढ़ती प्यास बुझाने की तैयारी, गारगाई डैम और डिसैलिनेशन परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

Mumbai Water Supply Expansion: मुंबई की बढ़ती जल मांग को पूरा करने के लिए बीएमसी ने गारगाई डैम, डिसैलिनेशन परियोजना और नई पाइपलाइन जैसी अहम योजनाओं को गति देने की तैयारी शुरू कर दी है।

अपूर्वा नायक

Mumbai Water Supply Expansion News: भविष्य में मुंबई को बढ़ती जल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जलापूर्ति क्षमता बढ़ाने के लिए मनपा ने बड़े कदम उठाए हैं।

गारगाई डैम, डिसैलिनेशन परियोजना तथा नई पाइपलाइन सहित महत्वपूर्ण परियोजनाओं के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तकनीकी सलाहकारों की नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव मंजूरी के लिए स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं।

मुंबई में वर्तमान में प्रतिदिन 4,100 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि शहर की चुकी है। बढ़ती जनसंख्या, नई आवासीय बस्तियों और विकास परियोजनाओं के कारण वर्ष 2041 तक यह मांग बढ़कर मनपा ने जलापूर्ति व्यवस्था के विस्तार पर विशेष जोर दिया है और अब इससे संबंधित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति मिलने जा रही है।

पांजरापूर में नया जल शोधन केंद्र

स्थायी समिति के समक्ष करखे गए प्रस्तावों में पांजरापूर में नया जल शोधन केंद्र, भांडुप में अत्याधुनिक जल पंपिंग केंद्र, गुंदवली से मोडकसागर तक नई पाइप लाइन का निर्माण तथा खारे पानी को पेयजल के रूप में उपलब्ध कराने वाली परियोजना शामिल है। विशेष रूप से डिसैलिनेशन परियोजना के माध्यम से मुंबई की वर्षा और डैम पर निर्भरता को कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी। करोड़ों रुपये की बचत होने की संभावना इन परियोजनाओं की तकनीकी योजना और क्रियान्वयन के लिए टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा गया है। संस्था के लंबे अनुभव के साथ-साथ कुछ परियोजनाओं में शुल्क में दी गई रियायतों के कारण मनपा को करोड़ों रुपये की बचत होने की भी संभावना है।

स्थायी समिति में सदस्यों का आक्रोश

बीएमसी के कई टेंडर में टाटा कंसल्टेंसी इंजीनियरिंग (टीसीई) को बतौर सलाहकार या टेंडर दिए जाने का आरोप बीएमसी स्थायी समिति सदस्यों ने लगाया है। उन्होंने पूछा है कि क्यों सलाहकार के रूप में टीसीई को ही नियुक्त किया जा रहा है। इसके अलावा बढ़ती 'सलाहकार संस्कृति' को लेकर बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने प्रशासन को जमकर घेरा।

विभिन्न विकास परियोजनाओं में एक ही सलाहकार कंपनी को बार-बार अवसर दिए जाने पर सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई। सदस्यों का आरोप था कि किसी कंपनी की तरफ से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के बाद उसी कंपनी को आगे के कार्यों का ठेका देना सीधे तौर पर 'हितों के टकराव (कॉर्नफ्लक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का मामला है।

यह विवाद मुंबई की महत्वाकांक्षी समुद्री जल को मीठा बनाने (डिसैलिनेशन) परियोजना के लिए सलाहकार नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ। प्रशासन ने बताया कि इस कार्य के लिए अमोल लॉट' कंपनी का चयन किया गया है, जिसने सलाहकार शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दी है, जिससे मनपा को 554 करोड़ रुपये की बचत होगी।

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