धारावी में नींद भी बनी संघर्ष, पुनर्विकास परियोजना से बेहतर जीवन की जगी उम्मीद

Dharavi Redevelopment Project: धारावी की संकरी बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए अच्छी नींद एक सपना बन गई है। प्रस्तावित पुनर्विकास परियोजना बेहतर आवास की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकती है।
Dharavi Redevelopment Project News
धारावी अर्बन रिन्यूअल प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )
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Dharavi Redevelopment Project News: कभी न सोने वाले शहर मुंबई की अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लाखों लोग एक कड़वी सच्चाई जान रहे हैं, वे चाहकर भी सो नहीं पाते हैं।

एशिया की सबसे घनी आबादी वाली झुग्गियों में से एक, धारावी की संकरी गलियों में, भीड़, गर्मी, शोर, तनाव और छोटे तंग घरों ने नींद लेने को हर रोज का संघर्ष बना दिया है, जिसे कई लोग असुविधा बताकर टाल देते हैं, वह तेजी से एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभर रही है।

यहां इतने बड़े घर शायद ही होते हैं कि पूरा परिवार समा सके, वहां रातें अक्सर शिफ्ट के हिसाब से बिताई जाती हैं। कुछ लोग काम से पहले जल्दी सो जाते हैं, तो कुछ लोगों को फर्श खाली होने का इंतजार करना पड़ता है।

आधी रात के बाद बिस्तर बिछाए जाते हैं और सूरज निकलने से पहले उन्हें फिर से मोड़ दिया जाता है ताकि खाना पकाने, सामान रखने और रोजमर्रा के कामों के लिए जगह बन सके। ऐसी संघर्ष भरी जिंदगी जी रहे धारावी वासियों को अब केवल धारावी के पुनर्विकास से ही उम्मीदें हैं।

गर्मी, तेज आवाज में थकान रोज की बात

जुबैदा खान, जो एक कमरे के टेनमेंट में रहती हैं और जिसमें परिवार के कई सदस्य रहते हैं, कहती हैं, 'कभी-कभी मेरा बेटा पहले सो जाता है, क्योंकि वह काम पर जल्दी चला जाता है। फिर बच्चे देर रात सोते हैं। जब भी थोड़ी खाली जगह मिलती है, मैं सो जाती हूं, लोगों को लगता है कि हमें इसकी आदत हो गई है, लेकिन यहां किसी को ठीक से आराम नहीं मिलता। यहां रहने वालों का कहना है कि थकान आम बात हो गई है। छत के पंखे लगातार चलते रहते हैं, किन्तु टिन की छत वाले ढांचे में फंसी गर्मी को हटा नहीं पाते। पास की फैक्ट्रियों, ट्रेनों, टेलीविजन, मशीनरी और तंग गलियों से देर रात तक आवाज आती रहती है।

धारावी से लोअर परेल रोज आने-जाने वाले एक कार्यकारी व्यावसायिक बाला सुब्रमण्यम ने कहा कि भरपूर नींद लगभग नामुमकिन है। उन्होंने कहा, 'आप हर दिन थके हुए उठते हैं। पूरी रात शोर रहता है-ट्रेनें, मशीनरी, पड़ोसी, टेलीविजन, गलियों में चलने वाले लोग। अंगर आप नींद जैसा महत्तूस नहीं छह घंटे भी सी लें। तो भी कभी असली होता। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक नीद की कमी के नतीजे गंभीर होते हैं और अक्सर उन्हें कम आंका जाता है।

धारावी प्रोजेक्ट लाएगा लोगों की जिंदगी में बदलाव

  • चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक नींद की कमी का हाइपरटेंशन, डायबिटीज, चिंता, अवसाद, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और दिल की बीमारी से गहरा संबंध है। फिर भी, दिखने वाली बीमारियों के उलट, खराब नींद के असर पर अक्सर तब तक ध्यान नहीं दिया जाता जब तक कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं न आ आए।
  • शहरी योजनाकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यहीं पर प्रस्तावित धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट बदलाव ला सकता है, सिर्फ एक आवास योजना के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप के तौर पर भी। पुनर्विकास से बड़े घर, बेहतर वैटिलेशन, संगठित बुनियादी ढांचा सुविधाएं, स्वाळता उन्नयन और योजनाबद्ध खुली जगहें मिलने का वादा किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि, ये बदलाव लाखों लोगों की नींद की गुणवत्ता और समग्र स्वास्थ्य में काळी सुधार ला सकते हैं।
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