Mumbai Vasai Virar Municipal Corporation Waste Management Tender: मुंबई वसई-विरार महानगरपालिका के 957.64 करोड़ रुपए के घनकचरा प्रबंधन टेंडर को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। टेंडर रद्द कर जांच कराने की मांग वाला प्रस्ताव दूसरी बार महासभा में बिना चर्चा के स्थगित कर दिया गया।
वसई-विरार शहर महानगरपालिका में 957.64 करोड़ रुपए के घनकचरा प्रबंधन टेंडर को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पांच वर्षों के लिए जारी इस बड़े ठेके में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। टेंडर प्रक्रिया रद्द कर मामले की गहन जांच कराने की मांग वाला प्रस्ताव लगातार दूसरी बार महासभा में बिना चर्चा के स्थगित कर दिया गया।
प्रस्ताव के दोबारा टलने से शहर की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। विपक्ष और कुछ नेताओं की ओर से टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और जल्दबाजी किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, मनपा के घनकचरा विभाग ने सड़कों की सफाई, नालियों के रखरखाव, घर-घर कचरा संग्रहण और कचरे को लैंडफिल तक पहुंचाने के लिए तीसरी बार वार्डवार निविदाएं आमंत्रित की थीं।
इस प्रक्रिया के तहत मेसर्स अमृत एंटरप्राइजेज, आरएनबी इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और क्रिस्टल इंटीग्रेटेड सर्विसेज लिमिटेड को वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक काम सौंपा गया है। इसी टेंडर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।
महासभा के एजेंडे में यह सवाल 15वें नंबर पर शामिल था। आरोप है कि बैठक शुरू होने के बाद इस मुद्दे पर चर्चा शुरू किए बिना ही प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया। लगातार दूसरी बार चर्चा टलने पर अधिवक्ता राहुल सिंह ने प्रशासन और नगरसेवकों की भूमिका पर सवाल उठाए।
राहुल सिंह ने कहा कि 957 करोड़ रुपए के इतने बड़े टेंडर में सार्वजनिक धन और नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल हैं। ऐसे में महासभा में पारदर्शी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कचरे के गलत निपटारे से प्रदूषण फैलने का भी आरोप लगाया।
वहीं, महापौर अजीव पाटिल ने प्रस्ताव स्थगित करने के पीछे कानूनी और तकनीकी कारणों का हवाला दिया। उनका कहना है कि अनुबंध को जल्दबाजी में रद्द करने पर महानगरपालिका को कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
महापौर के अनुसार, इस मामले में विस्तृत कानूनी सत्यापन और रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट और कानूनी पहलुओं की जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। दूसरी ओर, प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होने को लेकर विपक्ष और अन्य नेताओं के सवाल जारी हैं।