

PMC Pune News: पुणे नगर निगम (PMC) ने बकाया राशि का भुगतान न करने और अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के चलते शहर के छह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स (खेल परिसरों) को सील कर दिया है। विडंबना यह है कि एक ओर जहां मनपा ने यह सख्त कार्रवाई की है, वहीं दूसरी ओर इन परिसरों को फिर से चालू करने के लिए आवश्यक वैल्युएशन (मूल्यांकन) और नई टेंडर प्रक्रिया को अब तक पूरा नहीं किया जा सका है, जिससे शहर के खिलाड़ी खेल सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं।
सील किए गए छह खेल परिसरों में से दो वडगांवशेरी बुद्रुक में स्थित हैं, जबकि सोमवार पेठ, यरवदा, बोपोडी और वारजे में एक-एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स शामिल है। यह पूरा मामला तब सामने आया जब नगरसेवक सूरज लोखंडे ने नगर निगम की बैठक में इस मुद्दे पर सवाल उठाया, जिसके बाद प्रशासन को लिखित जवाब देना पड़ा।
प्रशासन के जवाब के अनुसार, पुणे के विकास योजना में खेल उपयोग के लिए 200 स्थान आरक्षित हैं, जिनमें 163 खेल के मैदान, 35 बच्चों के खेलने के क्षेत्र, एक जलीय (Aquatic) स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और एक वाटर स्पोर्ट्स साइट शामिल है। संपत्ति प्रबंधन विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि अब तक ऐसे 252 स्थान खेल विभाग को सौंपे जा चुके हैं।
हालांकि, प्रशासन के जवाब में कई खामियां हैं। इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन संपत्तियों की वर्तमान स्थिति क्या है या अतिक्रमण से बचाव के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। संपत्ति प्रबंधन, निर्माण और खेल विभागों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा स्पष्ट न होने से जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है।
समस्या की सबसे बड़ी जड़ पुरानी फाइलों का बैकलॉग है। इन खेल परिसरों के अनुबंध (Contracts) समाप्त हो चुके हैं, लेकिन पुणे नगर निगम ने नए टेंडर जारी करने के लिए जरूरी वैल्युएशन प्रक्रिया पूरी नहीं की है। अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि वैल्युएशन के बिना टेंडर जारी नहीं किए जा सकते। इस देरी के कारण ही ये छह सुविधाएं बंद पड़ी हैं।
जवाब से जुड़े एनेक्सचर के अनुसार, पिछले पांच वित्तीय वर्षों में पुणे मनपा ने ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट्स (TDR) या नकद मुआवजे के माध्यम से 68,002.76 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण किया है। इसमें से 36,389.73 वर्ग मीटर भूमि खेल के मैदान के आरक्षण के मुआवजे के रूप में आई है।
प्रशासन ने अपनी स्थिति का बचाव करते हुए तर्क दिया है कि अधिक परिसरों को बंद करने से उन एथलीटों को नुकसान होगा जो इन पर निर्भर हैं। लेकिन यही तर्क प्रशासन पर भी लागू होता है, वैल्युएशन और टेंडर जारी करने में हो रही देरी के कारण ही ये छह परिसरों पर ताला लटका है। वर्ल्ड-क्लास स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का दावा करने वाले पुणे शहर के लिए यह घटना कागजी लेटलतीफी और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को उजागर करती है।