मेट्रो-4 में 32 स्टेशन प्रस्तावित।
अगस्त 2027 तक 20 ट्रेनें मिलेंगी।
अधिकतम परिचालन गति 80 किमी/घंटा।
हर कोच में साइकिल स्टैंड।
Mumbai Thane Metro 4 First Train Features And Delivery Update: मुंबई और ठाणे के यात्रियों के लिए मेट्रो-4 परियोजना को लेकर अच्छी खबर है। गायमुख-वडाला-भक्ति पार्क के बीच बन रहे 35 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर के लिए पहली छह डिब्बों वाली अत्याधुनिक ट्रेन तैयार हो गई है।
आंध्र प्रदेश के श्रीसिटी स्थित अल्स्टॉम के कारखाने में बनी इस ट्रेन को दिवाली के बाद मुंबई के लिए रवाना किया जाएगा और दिसंबर में इसके पहुंचने की उम्मीद है। इससे मेट्रो-4 को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की तैयारी को गति मिलेगी। वहीं बताया गया है कि यह रैक बिजली की खपत को कम करेगी।
मुंबई के पूर्व उपनगर और ठाणे की यातायात समस्या कम करने के लिए एमएमआरडीए मेट्रो-4 और 4ए कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है। इस मार्ग पर 32 स्टेशन प्रस्तावित हैं। परियोजना को चार चरणों में शुरू किया जाएगा। पहले चरण में गायमुख से कैडबरी जंक्शन और दूसरे चरण में कैडबरी जंक्शन से मुलुंड फायर स्टेशन तक का 95 प्रतिशत सिविल निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
कॉरिडोर के लिए एमएमआरडीए ने एलएंडटी को 39 मेट्रो ट्रेन की आपूर्ति का जिम्मा सौंपा है। एलएंडटी, अल्स्टॉम के माध्यम से इन ट्रेनों का निर्माण करा रही है। एलएंडटी के महाप्रबंधक आशीष गुप्ता के अनुसार पहली ट्रेन तैयार हो चुकी है और दिसंबर में मुंबई मेट्रो स्टेशन पहुंचेगी।
अल्स्टॉम के आंध्र प्रदेश स्थित श्रीसिटी कारखाने में मेट्रो ट्रेनों का निर्माण तेजी से चल रहा है। कंपनी के प्रबंध निदेशक चंपक पांडा ने बताया कि अगस्त 2027 तक 20 ट्रेनें तैयार कर एमएमआरडीए को सौंप दी जाएंगी। इसी के साथ ही बाकी 19 ट्रेनें 2028 की शुरुआत तक उपलब्ध कराई जाएंगी।
मेट्रो-4 की ट्रेनों की अधिकतम तकनीकी क्षमता 90 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन इस कॉरिडोर पर इन्हें अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जाएगा।
मेट्रो-4 की ट्रेनों में पहली बार दरवाजों पर एंटी-ड्रैग सुरक्षा प्रणाली लगाई गई है। इसके तहत दरवाजा बंद होते समय किसी यात्री की साड़ी, सलवार या अन्य कपड़ा फंसने पर सेंसर तुरंत इसकी पहचान कर दरवाजा दोबारा खोल देगा। इससे यात्रियों के ट्रेन के साथ घिसटने और गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा टलेगा।
नई ट्रेनें पूरी तरह ड्राइवरलेस संचालन की तकनीक से लैस होंगी। सिग्नल प्रणाली और ट्रेन के उपकरणों के बीच तालमेल से रफ्तार बढ़ाने, ब्रेक लगाने और दरवाजे खोलने-बंद करने जैसी गतिविधियां ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर से नियंत्रित की जा सकेंगी।
ट्रेन और सिग्नल प्रणाली दोनों की आपूर्ति एक ही कंपनी द्वारा किए जाने से इनके बीच तकनीकी तालमेल आसान होगा। हालांकि, बिना ड्राइवर ट्रेन चलाने की शुरुआत कब होगी, इसका फैसला एमएमआरडीए करेगा।
- प्रत्येक ट्रेन में छह डिब्बे होंगे।
- बैठने के लिए 316 और कुल 2,280 यात्रियों की क्षमता होगी।
- प्रत्येक डिब्बे की लंबाई 22 मीटर और चौड़ाई 3.22 मीटर होगी।
- दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था होगी।
- मोबाइल चार्जिंग के लिए हर डिब्बे में 20 यूएसबी चार्जिंग पॉइंट होंगे।
- यात्रियों की सुविधा के लिए डिस्प्ले स्क्रीन की संख्या बढ़ाई गई है।
- ट्रेन के आगे और पीछे आपातकालीन दरवाजे होंगे।
- ट्रेन की अनुमानित आयु 35 वर्ष होगी।