Mumbai Stray Dogs Sterilization BMC Budget: शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी और देखरेख को लेकर 23 करोड़ रुपये की योजना को बुधवार को बीएमसी की स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमिटी) ने मंजूरी दे दी है।
प्रस्ताव के तहत अगले तीन वर्षों में करीब 1.34 लाख कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है। मुंबई में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाई कोर्ट के निर्देशानुसार, मनपा 1998 से गैर-सरकारी संस्थाओं के माध्यम से कुत्तों की नसबंदी करवा रही है और इस पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
इसके बावजूद समस्या कम नहीं हुई है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में आवारा कुत्तों की संख्या 90,757 है, जिनमें से 33,671 कुत्तों की नसबंदी नहीं हुई है।
इनमें 22,447 नर और 11,224 मादा कुत्ते शामिल हैं। कुल 57,086 कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है। हालांकि इस विषय के चर्चा के दौरान सदस्यों की तरफ से यह मुद्दा जोर-शोर से उठा कि अब तक हुए कार्य और उस पर खर्च की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। सदस्यों का कहना था कि पुराने आंकड़ों का हिसाब साफ किए बिना नए प्रस्ताव पर भरोसा करना कठिन है। कई नगरसेवकों ने योजना के खर्च और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासन से पारदर्शिता की मांग की।
मुंबई में आवारा कुत्तों का जनवरी 2024 में किया गया सर्वेक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस रिपोर्ट के माध्यम से शहर की वास्तविक स्थिति सामने आती है। मैंने स्थायी समिति के समक्ष इस रिपोर्ट को प्रस्तुत करने की मांग की थी। प्रशासन ने तुरंत यह रिपोर्ट उपलब्ध करा दी है। अब इस रिपोर्ट का गहन अध्ययन कर आवारा कुत्तों पर नियंत्रण तथा नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी उपाय किए जाएंगे। - तेजिंदर सिंह तिवाना (स्टैंडिंग कमिटी सदस्य, बीजेपी)
वर्ष 1998 से लेकर अब तक बीएमसी ने नसबंदी के लिए 70 करोड़ से अधिक खर्च किया है। इसके बाद भी सिर्फ 57 हजार कुत्तों की ही नसबंदी हुई है। तो क्या यह मुंबईकरों के टैक्स के पैसे का सही तरीके से उपयोग किया गया है? जब एक कुत्ते की नसबंदी 1500 रुपये में हो सकती है, तो इसके लिए बीएमसी 12 हजार रुपये खर्च क्यों कर रही है?
- जमीर कुरैशी (स्टैंडिंग कमिटी सदस्य, एमआईएम)
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कांग्रेस की नगरसेविका तुलिप मिरांडा ने आंकड़ों पर सवाल खड़े करते हुए बताया कि वर्ष 1998 से अब तक सिर्फ 57 हजार कुत्तों की नसबंदी की गई, जबकि इस पर लगभग 70 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उनके अनुसार प्रति कुत्ता खर्च करीब 12 हजार रुपये बैठता है, जो सामान्य लागत 1500 से 2000 रुपये से काफी अधिक है। उन्होंने अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। एआईएमआईएम के गोवंडी वार्ड 136 के नगरसेवक व स्टैंडिंग कमिटी सदस्य जमीर कुरैशी ने भी कार्य आवंटन को लेकर चिंता जताई, उनका कहना था कि लंबे समय से सीमित एनजीओ को ही काम दिया जा रहा है।