मुंबई लोकल ट्रेन (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

'लाइफलाइन' पर घटती लाइफ! रेल पटरियों पर थम नहीं रहा मौत का सिलसिला, जानिए 2025 के चौंकाने वाले आंकड़ें

Mumbai Local Accident: मुंबई लोकल में सफर दिन-ब-दिन जानलेवा बनता जा रहा है। 2025 में उपनगरीय रेल में 4,841 हादसे हुए, जिनमें 1,588 लोगों की मौत हुई। भीड़, ट्रैक क्रॉसिंग और लापरवाही सबसे बड़ी वजह हैं।

आकाश मसने

Mumbai Local Train Accident Death Report: 'हादसों का शहर है मुंबई', यह कहावत बिल्कुल प्रासंगिक बनी हुई है। मुंबई-एमएमआर में आवागमन के लिए सबसे सस्ती व सुलभ कही जाने वाली लोकल यात्रा दिन ब दिन कठिन होती जा रही है। रेल प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद पटरियों पर मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आंकड़े तो यही बता रहे हैं।

2025 हुईं 4,841 दुर्घटनाएं

मुंबई की लाइफलाइन कहे जाने वाले मुंबई उपनगरीय रेल खंड अर्थात लोकल की यात्रा करते समय यात्रियों की लाइफ खतरे में रहती है। मुंबई जीआरपी से मिली जानकारी के अनुसार बीते वर्ष 1जनवरी से लेकर 31 दिसंबर 2025 तक मुंबई उपनगरीय रेल क्षेत्र में कुल 4,841 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें चलती लोकल ट्रेनों से गिरने वाले यात्रियों की संख्या 1,713 रही जिसमें 1,188 घायल और 525 यात्रियों की मौत हो गई।

ट्रैक क्रासिंग में 1000 से ज्यादा की गई जान

ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी एवं अन्य कारणों से ट्रैक क्रॉसिंग करते समय भी 1063 लोगों की जान चली गई। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार ट्रैक क्रासिंग के 1,298 मामलों में 235 लोग घायल हुए जबकि 1063 की जान चली गई। मुंबई उपनगरीय रेल में ज्यादातर दुर्घटना लोकल ट्रेन से गिरने एवं ट्रैक क्रासिंग के चलते होती है।

टाले जा सकते हैं हादसे: जवेरी

समाजसेवी एवं रेलवे एक्टिविस्ट समीर जवेरी ने कहा कि मुंबई उपनगरीय रेल के हादसे पूरी तरह से टाले जा सकते हैं। जवेरी ने बताया कि भारतीय रेलवे के आरडीएसओ ने 2008-2009 में (16 वर्ष पूर्व) ही लोकल ट्रेनों की भीड़भाड़ रोकने हेतु 15 एवं 18 डिब्बों वाली उपनगरीय ट्रेनों को चलाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उसके क्रियान्वयन में अब भी देरी हो रही है। ट्रैक के किनारे बाउंड्री वॉल और प्लेटफॉर्म इंडिंग पर बाड़ लगाने जैसे सरल उपाय कर अनधिकृत क्रॉसिंग को समाप्त किया जा सकता है।

अब भी लोकल का ही सहारा

मेट्रो या सड़के भले बढ़ रहीं हैं लेकिन तेजी से बढ़े मुंबई-एमएमआर में एक किनारे से दूसरे किनारे पर जाने के लिए 80 प्रतिशत लोगों को अभी भी लोकल ट्रेन का सहारा लेना पड़ता है। लोकल में इस कदर भीड़ बढ़ गई है और यात्रियों को लोकल में खड़े होने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है। रोजाना यात्रा के दौरान विवाद, हिंसा और मारपीट होती रहती है। वहीं कई यात्री अत्यधिक गर्दी होने के कारण गिरकर अपनी जान गंवा रहे हैं। तो वाद विवाद में भी जान से हांथ धोना पड़ रहा है। पिछले दिनों भी इस तरह की कई घटनाएं हुई हैं। तमाम उपायों के बावजूद मुंबई में रेलवे ट्रैक पर होने वाली मौतों के आंकड़े कम नहीं हो रहे हैं।

रोजाना 8 से 9 मौतें !

वैसे आंकड़ों के अनुसार मुंबई की रेल पटरियों पर रोजाना 8 से 9 लोगों की मौत किसी न किसी कारण से होती है। मुंबई के अलावा एमएमआर में शहरों, उपनगरों की संख्या बढ़ने से सस्ती लोकल पर आम यात्रियों का भार भी बढ़ा है।

रोजाना 80 लाख यात्रियों का भार

मध्य व पश्चिम रेलवे की लोकल से रोजाना लगभग 80 लाख लोग यात्रा कर रहे हैं। मध्य रेलवे पर 45 लाख से ज्यादा एवं पश्चिम रेलवे की लोकल से 35 लाख यात्री निर्भर हैं। मध्य रेल पर 1850 से ज्यादा व पश्चिम रेलवे पर लगभग 1400 लोकल रोजाना चलती है, जिसमें एसी लोकल भी है।

- नवभारतलाइव के लिए मुंबई से सूर्यप्रकाश मिश्र की रिपोर्ट

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