Waris Patha Statement On Khilafat House Dispute: मुंबई के ऐतिहासिक खिलाफत हाउस की जमीन और इसके पुनर्विकास को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बीच AIMIM के नेता वारिस पठान अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और खिलाफत हाउस के मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ दिया।
खिलाफत हाउस की जमीन पर 120 बिस्तरों वाले एक आधुनिक अस्पताल के प्रस्तावित निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वारिस पठान ने मीडिया के सामने दावा किया कि इस ऐतिहासिक इमारत को गिराने के बाद चुपचाप पुनर्निर्माण का काम शुरू कर दिया गया था।
वारिस पठान ने आरोप लगाया कि खिलाफत कमेटी ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड से कोई अनुमति नहीं ली थी और इस कदम को पूरी तरह से अनुचित बताया।
AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा कि, "मुंबई में खिलाफत हाउस 1911 से स्थापित है। हमें जानकारी मिली कि इमारत को तोड़कर पुनर्विकास शुरू कर दिया गया है। खिलाफत कमेटी का दावा है कि यह वक्फ की संपत्ति नहीं है, जबकि वक्फ बोर्ड इसे अपनी जमीन बता रहा है। हमने इसका रास्ता यही निकाला है कि जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आता, इस पर कोई अवैध काम नहीं होने दिया जाएगा।"
मुंबई का खिलाफत हाउस क्या वक्फ की जमीन पर बना है, वक्फ की प्रॉपर्टी है, या किसी ट्रस्ट अथवा प्राइवेट ट्रस्ट की संपत्ति है, इसका फैसला कोर्ट में होगा।
खिलाफत हाउस पर ताला जड़ने को लेकर वारिस पठान के कहा कि हम वहां बरसों से जा रहे थे। अब हमें पता चला कि खिलाफत हाउस को अंदर तोड़ दिया गया है और वहां पर रीडेवलपमेंट चालु कर दिया। इसके बाद पहले वहां ट्रस्टियों से मुलाकात की उन्होंने बताया कि यह ट्रस्ट की जगह है, लीज पर है। हम इस पर काम कर रहे हैं। लेकिन लोगों ने कहा कि यह वक्फ बोर्ड की जमीन है, और खिलाफत बोर्ड इसे तोड़कर कर रीडेवलपमेंट कर रहा है।
इसके बाद हमने वक्फ से बात की तो उन्होंने बताया कि हमने कोई NOC नहीं दी है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार का गजट दिखाते हुए बताया कि यह जमीन वक्फ के नाम पर रजिस्टर्ड है। वारिस पठान ने कहा कि यदि ये जमीन वक्फ की है तो हम सर्व करेंगे।
वारिस पठान के बताया कि खिलाफत हाउस के अंदर एक क्रब थी उसे भी हटा दिया गया। यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौलाना मोहम्मद अली जौहर की पत्नी अमजदी बानो बेगम की कब्र थी। 1947 में उनके इंतकाल के बाद उन्हें वहां दफनाया गया था। उनके जनाजे में लाखों की संख्या में लोग आए थे।
AIMIM नेता वारिस पठान ने बताया कि खिलाफत हाउस को लेकर विवाद यह है कि खिलाफत कमेटी का कहना है कि यह उनकी जमीन है और वक्फ बोर्ड का कहना है यह वक्फ की प्रॉपर्टी है।
वारिस पठान ने वक्फ बोर्ड को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आपको इसका कस्टोडियन बनाया गया है तो आप ऐसे जमीन नहीं दे सकते। अगर आपने ऐसा कि तो हम वक्फ के खिलाफ भी केस करेंगे। इस पर वक्फ ने कहा कि हमने नोटिस दिया है, 15 दिन जवाब आएगा। वारिस पठान ने चेतावनी कि वक्फ बोर्ड की जमीन का सौदा किया तो इनको जेल भेजा जाएगा।
वारिस पठान ने कहा कि यह मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए हमने इसका हल यह निकाला कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता तब तक के लिए खिलाफत हाउस पर ताला लगा दिया जाए।
दूसरी ओर, ऑल इंडिया खिलाफत कमेटी (AIKC) के चेयरमैन सरफराज आरजू ने AIMIM और वारिस पठान द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि खिलाफत कमेटी का गठन मूल रूप से 1919 में हुआ था और 1954 में इसे चैरिटी कमिश्नर के तहत एक पब्लिक ट्रस्ट के रूप में बाकायदा पंजीकृत कराया गया था।
सरफराज आरजू का कहना है कि संबंधित जमीन मुंबई जिला कलेक्टर के अधीन आती है, इसलिए इस संस्था या जमीन को किसी भी स्थिति में वक्फ ट्रस्ट या वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नहीं रखा जा सकता।
गौरतलब है कि इससे पहले भी महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड ने समय पर ऑडिटेड खाते जमा न कराने के मुद्दे पर खिलाफत कमेटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसे कमेटी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वे वक्फ नहीं, बल्कि चैरिटी कमिश्नर के अधीन आने वाला एक स्वतंत्र पब्लिक ट्रस्ट हैं।
खिलाफत हाउस पर ताला लगाने और विरोध प्रदर्शन के बाद इस मामले में सियासी पारा चढ़ गया है। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता वसीम खान ने वारिस पठान के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि कानून हाथ में लेकर इमारत पर ताला लगाने का रवैया किसी भी तरह से सही नहीं है और इससे इलाके की कानून-व्यवस्था व शांति प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन मुस्तैद है।