पहले चरण की तीन पुनर्वास इमारतों में फ्लैटों का वितरण
मुख्यमंत्री ने 11 निवासियों को प्रतीकात्मक रूप से सौंपी चाबियां
160 वर्ग फुट के पुराने मकानों की जगह मिलेंगे 500 वर्ग फुट के सुविधायुक्त फ्लैट
BDD Chawl Redevelopment: मुंबई की संस्कृति और पहचान को संजोने वाले मूल मुंबईकरों को शहर से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। बीडीडी चॉल सहित विभिन्न पुनर्विकास परियोजनाओं के माध्यम से लंबे समय से मुंबई में रह रहे लोगों को उसी स्थान पर बड़े, सुविधायुक्त और उनके अधिकार के घर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। यह बात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कही।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) की ना. म. जोशी मार्ग-लोअर परेल स्थित बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना के पहले चरण में तैयार तीन पुनर्वास इमारतों के 557 पात्र निवासियों को घरों का वितरण किया।
मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने 11 निवासियों को प्रतीकात्मक रूप से घर की चाबियां और कब्जा पत्र सौंपे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीडीडी चॉल पुनर्विकास का काम निजी डेवलपर्स के बजाय म्हाडा के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया। इससे एशिया की सबसे बड़ी शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं में शामिल इस प्रकल्प को गति मिली। सरकार का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि चॉल में रहने वाले लोगों को गुणवत्तापूर्ण घर और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि बीडीडी चॉल का ऐतिहासिक महत्व है। संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के साथ ही मुंबई की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और मजदूर आंदोलनों के इतिहास में इन चॉलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और लोकमान्य तिलक जैसी महान हस्तियों का भी इन चॉलों से जुड़ाव रहा है।
फडणवीस ने बताया कि बीडीडी चॉल पुनर्विकास का मुद्दा कई वर्षों से लंबित था। निजी डेवलपर्स के माध्यम से परियोजना को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों को देखते हुए म्हाडा को ही डेवलपर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद वर्ष 2017-18 से पुनर्विकास का काम शुरू हुआ। बीच में कई बाधाएं आईं, लेकिन परियोजना को रुकने नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि बीडीडी चॉल में कई परिवार लगभग 160 वर्ग फुट के छोटे मकानों में दो से तीन पीढ़ियों के साथ रहते थे। अब उन्हें बैठक कक्ष, दो बेडरूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं से युक्त 500 वर्ग फुट के घर दिए जा रहे हैं। ये घर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मजबूत आधार साबित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2011 से पहले से बीडीडी चॉल में रहने वाले पात्र पुलिसकर्मियों को 15 लाख रुपये में घर देने का निर्णय कायम है। वर्ष 2011 के बाद की कटऑफ तारीख के कारण पात्रता से बाहर रह गए कुछ पुलिसकर्मियों को भी विशेष मामले के रूप में निर्माण लागत पर घर देने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में कीमतों के अंतर और अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए बैठक कर उचित रास्ता निकाला जाएगा।
मुख्यमंत्री ने नए घर प्राप्त करने वाले निवासियों से अपील की कि वे इन्हें अपनी पारिवारिक संपत्ति और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर समझकर संभालकर रखें। अच्छी कीमत मिलने पर भी इन घरों को बेचने के बजाय दो-तीन पीढ़ियों तक इस विरासत को सुरक्षित रखें।
उपमुख्यमंत्री एवं आवास मंत्री एकनाथ शिंदे ने संबंधित अधिकारियों को बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुनर्वास के मकानों की गुणवत्ता और नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। पुनर्वास के घर भी उतने ही गुणवत्तापूर्ण और सुविधायुक्त होने चाहिए, जितने बिक्री के लिए बनाए जाने वाले महंगे फ्लैट होते हैं।
उन्होंने कहा कि समूह पुनर्विकास से लोगों को केवल घर ही नहीं, बल्कि बेहतर सुविधाओं वाला संपूर्ण परिसर मिलता है। इसमें खुले स्थान, उद्यान, जिम, बच्चों के खेलने की जगह सहित कुल 23 प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
एकनाथ शिंदे ने यह भी कहा कि ना. म. जोशी मार्ग बीडीडी चॉल पुनर्विकास आंदोलन के दौरान युवाओं पर दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने के लिए राज्य सरकार कार्रवाई करेगी। सरकार की विकास नीति के केंद्र में आम नागरिक हैं। म्हाडा और अन्य सरकारी एजेंसियों को परियोजनाएं समय पर पूरी कर लोगों का विश्वास मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि मुंबई को झोपड़पट्टी मुक्त बनाने के उद्देश्य से विकास नियंत्रण नियमावली में आवश्यक बदलाव किए गए हैं। इससे म्हाडा और झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण की लंबित परियोजनाओं को गति मिली है। सरकार का प्रयास है कि पुनर्विकास के साथ निवासियों को उनका लंबित किराया भी मिल सके।
शिंदे ने बताया कि मुंबई में विश्वस्तरीय खुले उद्यान विकसित करने की योजना है। इसके तहत रेसकोर्स की 125 एकड़ और कोस्टल रोड के पास की लगभग 150 एकड़ जमीन मिलाकर करीब 300 एकड़ क्षेत्र में बड़ा सार्वजनिक उद्यान विकसित किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि 557 परिवारों के लिए यह दिन जीवनभर यादगार रहेगा। धनतेरस और दिवाली के अवसर पर अपने अधिकार के नए घर में प्रवेश का अवसर मिलना उनके लिए दोहरी खुशी का क्षण है। उन्होंने दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार द्वारा पिछले वर्ष आयोजित बीडीडी चॉल के चाबी वितरण कार्यक्रम की यादें भी साझा कीं।
उन्होंने कहा कि मुंबई के विकास में योगदान देने वाले मजदूरों, मेहनतकशों, मध्यमवर्गीय परिवारों, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना जरूरी है। नए घरों में प्रवेश करने वाले परिवार बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य, विशेषकर बेटियों की शिक्षा पर ध्यान दें।
सुनेत्रा पवार ने कहा कि बीडीडी चॉल की पहचान उसकी सामाजिक और सांस्कृतिक एकता रही है। यहां अलग-अलग भाषाओं और प्रदेशों के लोग मिल-जुलकर रहते आए हैं। नई इमारतों में भी चॉल संस्कृति की आपसी आत्मीयता, सहयोग और त्योहारों को मिलकर मनाने की परंपरा कायम रहनी चाहिए।
विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर ने बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना को गति देने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना म्हाडा की प्रमुख परियोजना बन गई है और इससे म्हाडा के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर लोगों के मन में बना संदेह भी दूर हुआ है। इसका लाभ कामाठीपुरा और उमरखाड़ी की पुनर्विकास परियोजनाओं को भी मिलेगा।
अहीर ने वरली क्षेत्र में बढ़ती आबादी के कारण पानी की आपूर्ति और सड़कों पर बढ़ते दबाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने फेमस स्टूडियो क्षेत्र से ना. म. जोशी मार्ग को जोड़ने वाला फ्लाईओवर बनाने का सुझाव दिया। इससे वरली के लोगों को सात रास्ता और आर्थर रोड नाका होकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने इस प्रस्ताव के लिए मुंबई महानगरपालिका से सहयोग दिलाने की मांग की।
- नवभारत लाइव के लिए मुंबई से अखिलेश तिवारी की रिपोर्ट