CJI सूर्यकांत पर पोस्ट से भड़का सुप्रीम कोर्ट, केरल कांग्रेस से पूछा- अवमानना की कार्रवाई क्यों न हो?

CJI Surya Kant: CJI सूर्यकांत को लेकर केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केरल कांग्रेस को फटकार लगाते हुए पूछा अवमानना की कार्रवाई क्यों न हो?
CJI Surya Kant
सीजेआई सूर्यकांतसोर्स-सोशल मीडिया
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Highlights:

  • सुप्रीम कोर्ट ने केरल कांग्रेस के नेताओं को नोटिस जारी किया

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि देश का संविधान सर्वोच्च है

  • केरल कांग्रेस के नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिखा था पोस्ट

Supreme Court Reprimanded Kerala Congress: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केरल कांग्रेस के नेताओं को नोटिस जारी किया है। शुक्रवार को अदालत ने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारियों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना के मामले में कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

यह मामला कांग्रेस की केरल इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X अकाउंट पर किए गए एक पोस्ट से जुड़ा है। इस पोस्ट में CJI सूर्यकांत को निशाना बनाया गया था। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट को हटा दिया गया।

मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ कर रही थी। यह सुनवाई वकील विनीत जिंदल की ओर से दाखिल याचिका पर हुई। याचिका में मांग की गई थी कि कांग्रेस के आधिकारिक अकाउंट से किए गए पोस्ट पर सुप्रीम कोर्ट खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई करे।

कांग्रेस ने मांगी बिना शर्त माफी

सुनवाई के दौरान केरल कांग्रेस की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि विवादित पोस्ट पदाधिकारियों की मंजूरी के बिना अपलोड किया गया था। पोस्ट को बाद में हटा दिया गया और पार्टी की ओर से बिना शर्त माफी भी मांग ली गई है।

इस पर जस्टिस अरविंद कुमार ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत यह देखेगी कि माफी केवल कागज और कलम से मांगी गई है या वास्तव में दिल से भी मांगी गई है।

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अदालत ने अभिव्यक्ति की आजादी पर क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि देश का संविधान सर्वोच्च है और कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक संगठन इससे ऊपर नहीं हो सकता। न्यायपालिका की स्वतंत्रता किसी राजनीतिक दल की सुविधा पर निर्भर नहीं करती।

पीठ ने कहा कि अदालत के फैसलों की आलोचना करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल न्यायपालिका को डराने या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और अधिकार को कमजोर करने की कोशिशों से सख्ती से निपटना जरूरी है।

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निखिल वागले और संजय राउत को भी मिला था नोटिस

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना सांसद संजय राउत को भी CJI के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के मामले में अवमानना का नोटिस जारी किया था।

फिलहाल केरल कांग्रेस के पदाधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से छूट दी गई है। कोर्ट अब यह जांच करेगा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत अवमानना की कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए या नहीं।