एमएमआरडीए गरीब नगर बांद्रा पुनर्वसन कुर्ला मकान फोटो सोर्स-X
मुंबई

गरीब नगर के पात्र रहिवासियों का पुनर्वसन शुरू, MMRDA ने कंप्यूटराइज्ड प्रणाली से कुर्ला में दिए 100 मकान

Mumbai MMRDA Housing Project: बांद्रा के गरीब नगर झोपड़पट्टी के 100 पात्र रहिवासियों को MMRDA ने कंप्यूटराइज्ड प्रणाली के जरिए कुर्ला में 279 वर्गफुट के मकानों का कब्जा सौंपना शुरू कर दिया है।

रूपम सिंह

MMRDA Garib Nagar Bandra Rehabilitation Kurla Homes: बांद्रा पूर्व के गरीब नगर झोपड़पट्टी के पात्र रहिवासियों का लंबे समय से अटका पुनर्वसन आखिरकार शुरू हो गया है। एमएमआरडीए ने 100 पात्र प्रकल्पग्रस्तों को कुर्ला में आवासों का वितरण किया।

घरों का आवंटन पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड पद्धति से किया गया, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ मानवीय हस्तक्षेप को भी खत्म किया गया है। पश्चिम रेलवे के विस्तार और रेल सुरक्षा के लिए मई में मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश के बाद गरीब नगर की झोपड़ियों पर कार्रवाई की गई थी।

इसके बाद एमएमआरडीए ने 15 अगस्त तक 100 पात्र रहिवासियों के पुनर्वसन का आश्वासन दिया था। हालांकि, पुनर्वसन इमारतों को निवासी प्रमाणपत्र नहीं मिलने से प्रक्रिया में देरी हुई। एमएमआरडीए ने उच्च न्यायालय में हलफनामा देकर प्रमाणपत्र मिलते ही पुनर्वसन पूरा करने का भरोसा दिया था। अदालत ने इसके लिए 30 सितंबर तक की समयसीमा दी थी।

समयसीमा समाप्त होने के बाद गुरुवार को एमएमआरडीए ने 100 रहिवासियों को घरों का प्रत्यक्ष कब्जा देना शुरू किया। एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी ने प्रतीकात्मक रूप से एक प्रकल्पग्रस्त को कब्जा पत्र सौंपकर घर का कब्जा दिया। इसके बाद अन्य रहिवासियों को भी कब्जा पत्र वितरित किए गए।

इस तरह आवंटित हुए आवास

16 पात्र रहिवासियों को कुर्ला स्थित एचडीआईएल की इमारत में, जबकि 84 को कुर्ला की ही दूसरी इमारत में आवास दी गई है। प्रत्येक घर 279 वर्गफुट का है। एमएमआरडीए ने पुनर्वसन प्रक्रिया में शत प्रतिशत पारदर्शिता और शून्य मानवीय हस्तक्षेप के लिए नई कंप्यूटराइज्ड प्रणाली शुरू की है।

इसी प्रणाली से पहली बार गरीब नगर के रहिवासियों को घर आवंटित किए गए। सीएसएमटी से विरार तक पश्चिम रेलवे विस्तार से प्रभावित प्रकल्पग्रस्तों का पुनर्वसन भी एमएमआरडीए आगे करेगा।

पुनवर्सन में बढ़ाई जाएगी तकनीक व पारदर्शिता

ई-पुनर्वसन प्लेटफॉर्म से परियोजना प्रभावितों के पुनर्वसन में तकनीक और पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है। इसमें आधार आधारित ऑफलाइन सत्यापन, पात्र लाभार्थियों का कंप्यूटराइज्ड आवंटन और डिजिटल आवंटन और कब्जा पत्र की सुविधा है।

इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होने, अनियमितताओं को घटाने और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध रहने में मदद मिलेगी।

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