म्हाडा (सोर्स सोशल मीडिया) 
मुंबई

म्हाडा को 121 करोड़ का चूना! डेवलपर्स पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज, ईओडब्ल्यू जांच में जुटी

MHADA Scam: मुंबई में ट्रांजिट टेनमेंट किराया मामले में कई डेवलपर्स पर 121 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। शिकायत के बाद आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अपूर्वा नायक

MHADA Transit Tenement Fraud Case: मुंबई में महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण को कथित रूप से 121 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाने के मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।

यह कार्रवाई प्राधिकरण की शिकायत के आधार पर की गई है। फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारी अतुल निकम द्वारा की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर दस्तावेजों और संबंधित लेनदेन की जांच शुरू कर दी है।

ट्रांजिट आवास के किराये को लेकर विवाद

मुंबई भवन मरम्मत एवं पुनर्निर्माण बोर्ड के उप मुख्य अधिकारी मोहन रावसाहेब बोबड़े ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कई डेवलपर्स को किराये के आधार पर अस्थायी ट्रांजिट आवास आवंटित किए गए थे, लेकिन उन्होंने लंबे समय से उसका किराया नहीं चुकाया।

कई डेवलपर्स के नाम शामिल

दर्ज प्राथमिकी में कई कंपनियों और डेवलपर्स के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें 9एम इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, नखवा एंड जसोल डेवलपर्स, प्रदीप गोरा गांधी, जेके बिल्डर, अलहमद डेवलपर, वर्धमान डेवलपर, उदिति प्रेमिसेस प्राइवेट लिमिटेड, संघवी प्रेमिसेस प्राइवेट लिमिटेड, आरआर बिल्डर्स और हरे कृष्णा बिल्डर्स एंड डेवलपर्स सहित अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।

वर्षों से नहीं चुकाया गया किराया

पुलिस के अनुसार वर्ष 1996 से 2021 के बीच प्राधिकरण ने विभिन्न पट्टे समझौतों, अनापत्ति प्रमाण पत्रों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के माध्यम से डेवलपर्स को अस्थायी आवास उपलब्ध कराए थे। आरोप है कि शुरुआत में डेवलपर्स ने कुछ समय तक किराया अदा किया, जिससे प्राधिकरण का विश्वास हासिल हुआ, लेकिन बाद में कथित तौर पर किराये का भुगतान बंद कर दिया।

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समझौते की शर्तों का उल्लंघन

जांच में यह भी सामने आया है कि किराया न चुकाने के कारण डेवलपर्स ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। पुलिस अब सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्राधिकरण को कितने समय से और कितनी राशि का नुकसान हुआ है।

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