महावितरण में 122 करोड़ का 'सोलर' घोटाला, 5 राज्यों में पुलिस की छापेमारी, फर्जी बैंक गारंटी से हुआ बड़ा खेल

Mahavitran Fraud Case 2026: महावितरण में 122.84 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी धोखाधड़ी। आर्थिक अपराध शाखा ने 5 राज्यों में की छापेमारी। सोलर योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा।
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Mahadiscom Scamप्रतीकात्मक तस्वीर (डिजाइन फोटो)
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Mahadiscom Scam: महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) में एक बहुत बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। सौर ऊर्जा परियोजना के नाम पर चार निजी कंपनियों ने फर्जी बैंक गारंटी जमा कर सरकार और जनता के साथ 122.84 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। इस सनसनीखेज मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक साथ पांच राज्यों में छापेमारी कर जांच तेज कर दी है।

महावितरण घोटाला 'सोलर एग्रीकल्चर चैनल 2.0' योजना की निविदा प्रक्रिया के दौरान हुआ। कंपनियों ने महावितरण के साथ बिजली खरीद समझौते (PPA) तो कर लिए, लेकिन इसके लिए जरूरी बैंक गारंटी पूरी तरह से फर्जी निकली। पुलिस ने मुंबई, ठाणे, दिल्ली, गुजरात और मध्य प्रदेश में कुल छह ठिकानों पर दबिश देकर महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज जब्त किए हैं।

सौर ऊर्जा योजना की आड़ में सुनियोजित साजिश

सोलर एग्रीकल्चर चैनल 2.0 योजना का उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराना था। इस योजना के तहत बोली प्रक्रिया में भाग लेने वाली चार कंपनियों ने बैंक की फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का उपयोग कर 122.85 करोड़ रुपये की गारंटी जमा की। जब महावितरण ने बैंक से इन गारंटियों का सत्यापन (Verification) कराया, तब बैंक ने इनके फर्जी होने की पुष्टि की। इसके बाद 20 फरवरी को निर्मलनगर पुलिस स्टेशन में संबंधित कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

धोखाधड़ी में शामिल कंपनियों की सूची

आर्थिक अपराध शाखा ने जिन कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उनमें प्रमुख रूप से मेसर्स नाकॉफ ऊर्जा प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स एनओपीएल प्रोजेक्ट्स, मेसर्स इंटीग्रेशन इंडक्शन पावर लिमिटेड, मेसर्स आईआईपीएल हिंगोली/परभणी, और मेसर्स ओनिक्स रिन्यूएबल लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों ने न केवल फर्जी दस्तावेज पेश किए, बल्कि समझौते की शर्तों के अनुसार वित्तीय समापन (Financial Closure) की प्रक्रिया से भी परहेज किया, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान हुआ।

महावितरण के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी शक की सुई

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि महावितरण के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी पुलिस की रडार पर हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि बिना किसी आंतरिक मिलीभगत के इतनी बड़ी राशि की फर्जी गारंटी स्वीकार करना संभव नहीं था। पिछले महीने भी एक कंपनी पर 100 करोड़ की फर्जी गारंटी का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस अब उन अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है जिन्होंने निजी लाभ के लिए इन कंपनियों को अनुबंध दिलाने में मदद की थी।

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