Mumbai Metro 6 Funding: मुंबई की लगातार बढ़ती यातायात समस्या के बीच मेट्रो-6 परियोजना को वित्तीय रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने 121 करोड़ रुपए के कर्ज पर मुहर लगा दी है। न्यू डेवलपमेंट बैंक से मिलने वाली इस राशि को एमएमआरडीए के जरिए परियोजना पर खर्च किया जाएगा। स्वामी समर्थ नगर-जोगेश्वरी-विक्रोली कॉरिडोर के आकार लेने से इन इलाकों के बीच सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
इस मेट्रो सेवा के शुरू होने पर बड़ी संख्या में यात्रियों को सड़क परिवहन के विकल्प के रूप में तेज और सुविधाजनक सफर मिल सकेगा, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता और सड़कों पर यातायात का दबाव कम होने की संभावना है। इसके साथ ही रोजाना सफर में लगने वाले समय और ईंधन की बचत से नागरिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मुंबई मेट्रो मार्ग-6 परियोजना के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक से कुल 241 मिलियन डॉलर, यानी करीब 1900 करोड़ रुपये की कर्ज सुविधा मंजूर है।
इस मंजूर कर्ज में से अब तक राज्य सरकार द्वारा कोई राशि वितरित नहीं की गई थी। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजटीय व्यवस्था से 121.0029 करोड़ रुपये एमएमआरडीए को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। यह राशि कर्ज के रूप में दी जा रही है और इसकी अदायगी निर्धारित शर्तों के अनुसार करनी होगी।
मेट्रो-6 कॉरिडोर के शुरू होने से स्वामी समर्थ नगर, जोगेश्वरी और विक्रोली के बीच सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। वर्तमान में इन क्षेत्रों के बीच बड़ी संख्या में यात्री सड़क मार्ग से आवागमन करते हैं। मेट्रो सेवा उपलब्ध होने पर यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने और प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव घटने की संभावना है।
कुल लंबाई: करीब 15.31 किलोमीटर
कुल स्टेशन: 13 एलिवेटेड स्टेशन
प्रमुख मार्ग: जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड, पवई और आरे क्षेत्र
यात्रा समय में बचत अंधेरी से विक्रोली के सफर में करीब 30 से 45 मिनट की बचत
आदर्श नगर : मेट्रो लाइन-2ए
जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड मेट्रो लाइन-7
आरे कॉलोनी मेट्रो लाइन-3
गांधीनगर/कांजूरमार्ग पश्चिम: मेट्रो लाइन-4
जोगेश्वरी और कांजूरमार्ग लोकल रेलवे स्टेशनों से कनेक्टिविटी
परियोजना का काम अतिम चरण में है। पियर्स और गर्डर लगाने का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। कांजूरमार्ग कारशेड की जमीन का कब्जा मिलने में देरी के कारण प्रशासन ने शुरुआती दौर में डिपो के बिना एलिवेटेड मेंटेनेस व्यवस्था के जरिए मुंबई मेट्रो चलाने की योजना बनाई है।
मेट्रो कनेक्टिविटी बेहतर होने से रोजाना काम, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने-जाने वाले नागरिकों को सफर में लगने वाले समय में बचत होने की उम्मीद है।
इसके साथ ही सड़क मार्ग से होने वाले आवागमन में कमी आने पर ईंधन की खपत में भी बचत हो सकती है।
इस तरह परियोजना का लाभ केवल सार्वजनिक परिवहन तक सीमित न रहकर यातायात प्रबंधन और नागरिकों की रोजमर्रा की आवाजाही पर भी पड़ने की उम्मीद है।
राज्य सरकार ने कर्ज की राशि के उपयोग को लेकर एमएमआरडीए पर कई शर्तें लगाई हैं। एनडीबी से प्राप्त राशि एमएमआरडीए के खाते में जमा होने का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। राशि का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए करना होगा, जिसके लिए बैंक ने कर्ज मंजूर किया है। एमएमआरडीए को खर्च का विवरण राज्य और केंद्र सरकार को देना होगा। कर्ज की मूल राशि के साथ ब्याज की अदायगी की जिम्मेदारी भी एमएमआरडीए की होगी।
कर्ज करार के अनुसार 15 अगस्त 2028 से अदायगी शुरू होगी। कर्ज की लगभग 6.38 मिलियन डॉलर की छमाही किश्तें निर्धारित हैं और कुल 40 किश्तों में भुगतान किया जाना है। अंतिम किश्त 15 फरवरी 2049 को देय होगी। व्याज की अदायगी भी छमाही आधार पर होगी।