

Kumar Vishvas Rajya Sabha BJP: उत्तर प्रदेश कोटे की 10 राज्यसभा सीटों को लेकर भारतीय जनता पार्टी में मंथन का दौर जारी है। भाजपा से राज्यसभा जाने वाले दावेदारों की लिस्ट में मशहूर कवि कुमार विश्वास का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, यह कोई पहली बार नहीं है, जब उनके नाम की चर्चा है। इससे पहले विधान परिषद के लिए यूपी से भेजे गए नामों के पैनल में भी उनका नाम शामिल किया गया था। पार्टी के करीबी सूत्रों के मुताबिक, विधान परिषद पर बात नहीं बन सकी थी।
कुमार विश्वास के नाम पर इसलिए भी चर्चा तेज है, क्योंकि हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए जेन-जी आंदोलन के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार का समर्थन किया था। भाजपा के पास जो आठ सीटें हैं, पार्टी फिर से उन्हें अपने कब्जे में लेने की पुरजोर कोशिश करेगी। राज्यसभा उम्मीदवार के लिए संभावित नामों पर पिछले दिन पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में चर्चा की गई थी।
भारतीय जनता पार्टी के करीबी सूत्रों की माने तो इस फेहरिस्त में कुछ और नाम शामिल करने की सलाह दी गई थी। संभावितों में कवि कुमार विश्वास को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि पार्टी की ओर से कुमार विश्वास के नाम को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों का कहना है कि तीन या चार अक्टूबर को प्रत्याशियों के नामों की घोषणा हो सकता है।
अगर भारतीय जनता पार्टी कुमार विश्वास को राज्यसभा भेजने का अंतिम निर्णय लेती है, तो इसके पीछे पार्टी की एक सोची-समझी सामाजिक-राजनीतिक रणनीति हो सकती है। कुमार विश्वास अपनी ओजस्वी भाषण शैली, राष्ट्रवाद और पैनी राजनीतिक टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। संसद के उच्च सदन में वह पार्टी के पक्ष को बौद्धिक और आक्रामक तरीके से रखने में सक्षम साबित हो सकते हैं।
एक लोकप्रिय कवि और वक्ता होने के नाते उनकी फैन फॉलोइंग युवाओं, प्रबुद्ध वर्ग और मध्यम वर्ग में खासी है। इससे पार्टी शहरी मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश दे सकती है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्राह्मण चेहरे के रूप में उनके नाम पर विचार करके पार्टी व्यापक सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।
आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे कुमार विश्वास के जरिए भाजपा सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल और 'आप' की नीतियों पर आक्रामक हमले जारी रख सकती है, जिसका असर दिल्ली और पंजाब के चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस तरह के फैसलों के अपने फायदे और नुकसान भी होते हैं। पार्टी में कई ऐसे निष्ठावान और वरिष्ठ नेता हैं जो लंबे समय से जमीन पर काम कर रहे हैं। बाहर से आने वाले चेहरों को सीधा बड़ा राजनीतिक पद मिलने पर कैडर स्तर पर सुगबुगाहट हो सकती है।
कुमार विश्वास अतीत में भाजपा के कई शीर्ष नेताओं पर तीखे राजनीतिक तंज कस चुके हैं। विपक्षी दल जैसे कि सपा और कांग्रेस उनके पुराने बयानों और भाषणों का हवाला देकर भाजपा को घेरने की कोशिश कर सकते हैं।
कुमार विश्वास की अपनी एक स्वतंत्र और बेबाक छवि रही है। ऐसे में सांगठनिक अनुशासन और राजनीतिक प्राथमिकताओं के साथ उनका तालमेल बिठाना भविष्य के लिए दोनों पक्षों पर निर्भर करेगा।
उत्तर प्रदेश से जुड़े किसी भी बड़े राजनीतिक फैसले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य की कोर कमेटी की राय बेहद अहम होती है। हाल ही में लखनऊ स्थित सीएम आवास पर हुई बीजेपी की कोर कमेटी की बैठकों में राज्य की सीटों और संभावित नामों पर गहन चर्चा की गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली हमेशा से योग्यता, प्रशासनिक दक्षता और वैचारिक प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देने वाली रही है। सार्वजनिक मंचों पर मुख्यमंत्री और कुमार विश्वास के बीच हल्के-फुल्के और सकारात्मक संवाद कई बार देखे गए हैं, लेकिन अंतिम मुहर राज्य के शीर्ष नेतृत्व के समन्वय और केंद्रीय आलाकमान की मुहर के बाद ही लगेगी।