Maharashtra Tribal Farmers News: राज्य सरकार ने वनाधिकार धारक आदिवासी किसानों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब उनके लिए अलग गांव नमूना 7-ई और 12-ई लागू होंगे जिससे उन्हें फसल ऋण, किसान पहचान संख्या, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। वहीं शर्तों का उल्लंघन कर उपयोग की जा रही सरकारी जमीन को वापस सरकारी कब्जे में लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।
वनाधिकार धारकों के लिए नए रिकॉर्ड राजस्व विभाग ने शासनादेश जारी कर वनाधिकार धारकों के लिए अलग 7-ई और 12-ई रिकॉर्ड लागू करने का निर्णय लिया है। इससे आदिवासी किसानों को सामान्य किसानों की तरह बैंक से फसल ऋण, कृषि योजनाओं, बीमा और प्राकृतिक आपदा सहायता का लाभ मिलेगा। पहले अलग रिकॉर्ड नहीं होने से उन्हें कई प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
मेट्रो लाइन-4 कारशेड के लिए किसानों की वर्ग-2 जमीन को बिना शुल्क वर्ग-1 में बदलने की मांग सरकार ने खारिज कर दी। सरकार का कहना है कि जनहित और नियमों को देखते हुए इतनी मूल्यवान सरकारी जमीन बिना निर्धारित शुल्क के नहीं दी जा सकती।
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महाराष्ट्र सरकार ने 31 अगस्त 2026 तक पात्र मामलों में नए रिकॉर्ड तैयार करने और जिन क्षेत्रों में 7/12 उपलब्ध नहीं हैं, वहां 31 दिसंबर 2026 तक संयुक्त सर्व कर अभिलेख बनाने के निर्देश दिए हैं। नए रिकॉर्ड में वनाधिकार वंशानुगत रहेगा लेकिन उसका हस्तांतरण नहीं किया जा सकेगा।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सिडको, नैना, एमएमआरडीए तथा स्थानीय निकायों की शर्तभंग वाली सरकारी जमीन को विशेष अभियान चलाकर सरकार के कब्जे में लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वर्ग-2 जमीनों की जानकारी जुटाने और नियमों के अनुसार वर्ग-1 में परिवर्तन के लिए पूरा प्रीमियम व दंड वसूलने के आदेश भी दिए है।