

Maharashtra Assembly Session: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में जबरदस्त राजनीतिक सरगर्मी देखने को मिली। सदन में एक तरफ जहां सत्तापक्ष के ही एक वरिष्ठ नेता ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग को लेकर अपनी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए, वहीं दूसरी तरफ अल्पसंख्यक आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
इसी दौरान भाजपा के वरिष्ठ विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने महाराष्ट्र विधानसभा में अपनी ही सरकार से सवाल किया कि हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने संबंधी प्रस्ताव पारित करने में आखिर देरी क्यों हो रही है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार का इस मुद्दे पर रुख बदला है तो उसे स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए। सत्ता में आने के बाद किसी भी राजनीतिक दल को अपनी मूल विचारधारा नहीं बदलनी चाहिए। यदि सरकार का रुख बदला है तो उसे खुलकर इसकी जानकारी देनी चाहिए।
मुनगंटीवार ने याद दिलाया कि उन्होंने मार्च में विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश कर वीर सावरकर की मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की थी। 5 मार्च प्रस्ताव पर शीघ्र विचार का आश्वासन दिया था।
महाराष्ट्र विधानसभा में मुस्लिम समाज के शैक्षणिक आरक्षण, छात्रवृत्ति और मौलाना आजाद फाइनेंस कॉर्पोरेशन के मुद्दे पर जोरदार बहस हुई। कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने सरकार पर अल्पसंख्यक विभाग को निष्क्रय करने का आरोप लगाया।
उनके भाषण के दौरान मंत्री नितेश राणे के हस्तक्षेप से सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई। बाद में मंत्री नरहरी झिरवल और छगन भुजबल ने सरकार का पक्ष रखा। अमीन पटेल ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने अल्पसंख्यक समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से अल्पसंख्यक विभाग की स्थापना की थी। लेकिन आज यह विभाग लगभग निष्क्रय हो चुका है और इसके पास पर्याप्त बजट भी उपलब्ध नहीं है।