Maharashtra TET Exam Paper Leak: महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा पेपर लीक मामले में पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपियों ने कई राज खोले हैं। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि टीईटी का पेपर प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने डिस्पोजल बॉक्स से खराब कॉपियां चुराई और उन्हें अपने जूतों के अंदर छिपाकर रैकेट के कथित सरगना तक पहुंचाया।
जांच के दौरान पता चला कि प्रिंटिंग प्रेस के अंदर जिन क्वेश्चन पेपर की प्रिंटिंग की मामूली कमियां या स्याही के निशान थे, उन्हें कूड़ेदान (डिस्पोजल बॉक्स) में फेंक दिया जाता था। डिस्पोजल एरिया में पूरी तरह निगरानी नहीं थी। इसी का फायदा उठाकर दो कर्मचारियों ने खराब पेपरों को नष्ट होने से पहले ही निकाल लिया।
मास्टरमाइंड तक ऐसे पहुंचाया इसके पीछे प्रिंटिंग प्रेस में करीब 20 साल से काम कर रहे बाबूलाल कुशवाहा का नाम सामने आया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पहले बाबूलाल कुशवाहा ने कथित तौर पर छपाई की प्रक्रिया के दौरान डिस्पोजल बॉक्स से खराब प्रश्न-पत्र चुराए।
उन्होंने कथित तौर पर नरेश कुमार महौर उर्फ निक्की (जो घंटे के हिसाब से काम करने वाले अस्थायी कर्मचारी थे) की मदद से पेपरों को जूतों के तलवों के नीचे छिपाया और उन्हें प्रिंटिंग प्रेस कैंपस से बाहर निकाला। इसके बाद पेपर प्रिंटिंग प्रेस के पूर्व कर्मचारी सोनू दिवाकर को सौंपे गए।
पुलिस जांच में सामने आया है कि बाबूलाल कुशवाहा प्रिटिंग प्रेस में करीब 20 साल से काम कर रहा है। उसे महीने में लगभग 15,000 रुपये मिलते हैं। वहीं साथी निक्की को 45 रुपये प्रति घंटा मिलते थे। अगर काम ज्यादा हो तो निक्की एक दिन में लगभग 400-500 रुपये कमा लेता था। उन्हें ज्यादा पैसे का लालच देकर महाराष्ट्र टीईटी का पेपर लीक करवाया गया था।
पुलिस का आरोप है कि बिजेंद्र ने शुरू में चोरी में मदद के लिए दोनों को लगभग 8,000 रुपये दिए और उन्हें भरोसा दिलाया कि लीक हुए पेपर बेचकर होने वाली कमाई से वह उनके लिए प्लॉट खरीदेगा।