महाराष्ट्र में 4.4 लाख शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य, 2027 तक परीक्षा पास नहीं की तो जा सकती है नौकरी

TET Exam: महाराष्ट्र के सरकारी और निजी स्कूलों के 4.4 लाख से अधिक शिक्षकों को सितंबर 2027 तक TET Exams पास करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 1.1 लाख शिक्षकों पर नौकरी जाने का खतरा मंडरा रहा है।
Maharashtra TET Mandatory
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Maharashtra Teachers TET Mandatory: महाराष्ट्र के सरकारी और निजी स्कूलों में 50 वर्ष से अधिक आयु के 1.1 लाख से ज्यादा शिक्षकों को अपनी नौकरी बनाए रखने के लिए सितंबर 2027 तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करनी होगी।

वहीं कुल शिक्षकों की संख्या 4.4 लाख के करीब है। केंद्र सरकार को सौंपने के लिए महाराष्ट्र स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से संकलित राज्य के आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले, जिसके तहत कई सेवारत शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य कर दी गई है, इसका असर राज्य के लगभग 90% शिक्षकों पर पड़ा है।

राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट आदेश न होने के कारण लाखों शिक्षकों के सिर पर संभावित नौकरी जाने की आशंका मंडरा रही है। कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के 4,95,437 शिक्षकों में से 4.4 लाख से अधिक को अब टीईटी पास करनी होगी।

इनमें से लगभग 1.1 लाख शिक्षक 50 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी करीब 15 साल शेष हैं। हालांकि, राज्य की मुख्य चिंता सरकारी स्कूलों को लेकर है, जहां शिक्षकों की नियुक्ति सीधे उसके नियंत्रण में होती है, लेकिन इन आंकड़ों में पूरे महाराष्ट्र के सभी सेवारत शिक्षकों का विवरण शामिल हैं, जिनमें स्व-वित्तपोषित स्कूलों में काम करने वाले शिक्षक भी शामिल हैं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, कुल शिक्षकों में से आधे से भी कम लगभग 1.5 लाख शिक्षक ऐसे हैं, जो सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैं और जिनके पास टीईटी की योग्यता नहीं है।

स्कूलों में स्टाफ की कमी की आशंका बढ़ी

पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, टीईटी न केवल नई नियुक्त्तियों के लिए बल्कि उन सेवारत शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य है, जिनकी सेवा में पांच वर्ष से अधिक का समय शेष है। आदेश के दो वर्षों के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण न करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ेगा, जिससे पहले से ही शिक्षक कमी से जूझ रहे स्कूलों में नौकरी जाने और स्टाफ की कमी की आशंका बढ़ गई है। कई राज्यों द्वारा इसी तरह की चिंताएं जताए जाने के बाद, केंद्र सरकार ने राज्यों से आयु और नियुक्ति वर्ष से संबंधित आंकड़े मांगे हैं, ताकि इस पूर्वव्यापी आदेश के प्रभाव का आकलन किया जा सके।

92% शिक्षकों के पास यह योग्यता नहीं

महाराष्ट्र के आंकड़े बताते है कि वर्तमान में सेवा में मौजूद 2.5 लाख से अधिक शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। 2011 वही वर्ष है जब राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने भर्ती के लिए टीईटी को अनिवार्य योग्यता के रूप में लागू किया था।

प्राथमिक स्कूलों में टीईटी-अयोग्य शिक्षकों का अनुपात सबसे अधिक है। कक्षा 1 से 5 तक महाराष्ट्र में कुल 3,06,336 शिक्षक है, लेकिन इनमें से केवल 22,975 ने ही टीईटी पास की है। यानी लगभग 92% शिक्षकों के पास यह योग्यता नहीं है।

कक्षा 6 से 8 तक, कुल 1,89, 101 शिक्षकों में से केवल 26,490 टीईटी योग्य हैं, जबकि करीब 86% शिक्षक बिना टीईटी के है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से सेवारत शिक्षकों में चिंता बढ़ी है, जिसका असर टीईटी 2025 के लिए रिकॉर्ड संख्या में हुए पंजीकरण में देखा गया।

4.7 लाख ने कराया पंजीकरण

परीक्षा के लिए 4.7 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया। 3 फरवरी को घोषित परिणामों में कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 11.28% रहा, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक बड़ा इजाफा है। टीईटी की शुरुआत 2013 में होने के बाद से इससे पहले कभी भी पास प्रतिशत 5% से ऊपर नहीं गया था।

Navbharat Live
navbharatlive.com