Rajya Sabha election Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया) 
मुंबई

विधान परिषद में भी बढ़ेगा बीजेपी का प्रभाव, उद्धव सहित 9 सदस्यों का खत्म हो रहा है कार्यकाल

BJP Influence Maharashtra: महाराष्ट्र विधान परिषद की नौ सीटें खाली होने जा रही हैं, जिनमें उद्धव ठाकरे का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है, ऐसे में आगामी चुनावों में बीजेपी का प्रभाव बढ़ा है।

आंचल लोखंडे

Maharashtra Legislative Council Election: महाराष्ट्र विधान परिषद की नौ सीटें मई महीने में खाली होने जा रही हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी शामिल हैं, जिनका विधान परिषद सदस्य के रूप में कार्यकाल 13 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या उद्धव ठाकरे फिर से विधान परिषद का चुनाव लड़ेंगे और क्या वे इस बार जीत पाएंगे। राज्य में महाविकास आघाड़ी (मविआ) की सरकार के समय उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे।

हालांकि उस समय वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे, इसलिए उन्होंने विधान परिषद का चुनाव लड़ा था। उस वक्त उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना सहित मविआ के घटक दलों के पास पर्याप्त संख्या बल था, जिससे उन्हें चुनाव जीतने में कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। इस बार उद्धव ठाकरे की शिवसेना सहित पूरे विपक्षी गठबंधन को संख्या बल की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कोई भी विपक्षी दल अपने दम पर राज्यसभा या विधान परिषद में उम्मीदवार नहीं भेज सकता।

राज्यसभा चुनाव से बदलेंगे समीकरण

विधान परिषद चुनाव से पहले राज्यसभा की सात सीटों के लिए चुनाव होने हैं। जानकारों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजों से विधान परिषद का समीकरण भी प्रभावित होगा। यदि राज्यसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) राकां (एसपी) के वरिष्ठ नेता शरद पवार को समर्थन देकर उन्हें राज्यसभा भेजती है, तो ही वह विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस और राकां से उद्धव के लिए समर्थन मांग पाएगी। यदि तीनों दल एकजुट नहीं होते हैं, तो इसका सीधा लाभ सत्तारूढ़ महायुति को मिलेगा।

मविआ के केवल एक-एक उम्मीदवार जीतने की संभावना

राज्य में बीजेपी के 131, शिवसेना (शिंदे गुट) के 57 और राकां (अजीत पवार) के 40 विधायक हैं। इसके अलावा छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों को मिलाकर सत्तारूढ़ महायुति के पास लगभग 235 विधायकों का समर्थन है। दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के 20, कांग्रेस के 16 और राकां (एसपी) के 10 विधायकों के साथ सपा और एमआईएम को मिलाकर विपक्ष की कुल संख्या करीब 50 के आसपास पहुंचती है।

ऐसे में विधानसभा में उपलब्ध विधायकों की संख्या के आधार पर विपक्षी दल यदि एकजुट होते हैं, तभी उनका एक-एक सदस्य राज्यसभा और विधान परिषद में चुना जा सकता है। यानी राज्यसभा में महायुति के छह और विधान परिषद में आठ सदस्यों का चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं मविआ का एक-एक उम्मीदवार तभी जीत सकता है, जब शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और राकां (एसपी) में सहमति बने।

राउत की उद्धव से चुनाव लड़ने की अपील

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने रविवार को कहा कि राकां (एसपी), कांग्रेस और उनकी शिवसेना मिलकर आगामी विधान परिषद और राज्यसभा चुनावों में एक-दूसरे की मदद करेंगे, तभी उनके उम्मीदवार निर्वाचित हो पाएंगे। उन्होंने आगे कहा, “हम सभी ने मिलकर उद्धव ठाकरे से विनती की है कि आपने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया है। आपका विधानमंडल में फिर से जाना राज्य और जनता के लिए जरूरी है। हम चाहते हैं कि वे फिर से चुनाव लड़ें।”

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