MLA Japan Trip Cancelled Rahul Narwekar Decision: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील के बाद महाराष्ट्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में, महाराष्ट्र विधानसभा के 12 विधायकों के एक समूह को जापान के अध्ययन दौरे पर जाना था। जापान के दो अलग-अलग राज्यों के राज्यपालों ने इस प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया था, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए इस प्रस्तावित यात्रा को रद्द कर दिया है।
वर्तमान में खाड़ी देशों (Middle East) में चल रहे युद्ध ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को अस्थिर किया है, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों को भी प्रभावित किया है। भारत अपनी ईंधन जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, जिसका भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती लागत का सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने अपनी जनसभाओं में स्पष्ट किया है कि मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग में विदेश में छुट्टियां मनाने और शादियां करने का बढ़ता चलन वर्तमान परिस्थितियों में चिंताजनक है।
प्रधानमंत्री की अपील के पीछे का मुख्य उद्देश्य भारत के डॉलर भंडार को सुरक्षित करना है। मोदी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल खरीदने पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार चाहती है कि नागरिक कम से कम एक साल के लिए विदेश यात्राओं को स्थगित करें और सोना खरीदने से बचें, क्योंकि सोने का आयात भी डॉलर भंडार पर दबाव डालता है। विधायकों का दौरा रद्द होना इसी दिशा में एक प्रतीकात्मक और प्रभावी कदम माना जा रहा है।
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संकट के इस समय में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) और वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल मीटिंग के जरिए न केवल समय की बचत होती है, बल्कि ईंधन की खपत में भी भारी कमी लाई जा सकती है। महाराष्ट्र सरकार ने भी इस दिशा में मंत्रियों और अधिकारियों को बैठकों के लिए ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं।
विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विधायकों की यात्रा रद्द करना जनता के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सरकार खुद से त्याग की शुरुआत कर रही है। जब जनप्रतिनिधि खुद अपनी विदेश यात्राएं त्याग रहे हैं, तो आम नागरिकों को भी राष्ट्रहित में मितव्ययिता बरतने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। आने वाले समय में राज्य सरकार द्वारा फिजूलखर्ची रोकने के लिए और भी कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।