कर्नाटक में SIR पर सियासी घमासान, प्रकाश राज समेत सिविल सोसाइटी ने CM शिवकुमार से दखल की मांग की

Karnataka SIR Controversy: कर्नाटक वोटर लिस्टमें SIR को लेकर सिविल सोसाइटी ने CM शिवकुमार से दखल की मांग की। प्रकाश राज समेत प्रतिनिधियों ने वोटर लिस्ट से नाम हटने की आशंका जताई।
Karnataka SIR Controversy
कर्नाटक वोटर लिस्टसोर्स -IANS
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Prakash Raj On Voter List Revision: कर्नाटक में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अभिनेता प्रकाश राज की अगुवाई में सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात कर प्रक्रिया में हस्तक्षेप की मांग की।

प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का खतरा है। संगठनों के मुताबिक करीब 1.09 करोड़ मतदाताओं को एएसडीडीओ श्रेणी में रखा गया है, जबकि राज्य के करीब 3,000 मतदान केंद्रों पर नाम हटाने की दर 60 फीसदी से अधिक बताई गई है।

कर्नाटक में SIR को लेकर बढ़ी सियासी हलचल

अभिनेता प्रकाश राज की अगुवाई में 'एड्डेलु कर्नाटक' और दूसरे सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधियों के एक दल ने विधान सौधा में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपने से पहले एसआईआर प्रक्रिया में कथित कमियों पर चर्चा की। प्रतिनिधियों ने दावा किया कि कर्नाटक में देश में सबसे ज्यादा वोटर लिस्ट से नाम हटाने की घटनाएं हो रही हैं।

3,000 बूथों पर 60% से ज्यादा नाम हटाने का आरोप

उन्होंने कहा कि लगभग 1.09 करोड़ वोटरों को एएसडीडीओ (पहले ही शिफ्ट हो चुके, मृत, डुप्लिकेट या अन्य) कैटेगरी में रखा गया है, जिससे यह चिंता पैदा हो गई है कि वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम गायब हो सकते हैं,

खासकर बेंगलुरु में। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य भर के लगभग 3,000 पोलिंग बूथों पर नाम हटाने की दर 60 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है।

1.09 करोड़ वोटरों को ASDDO श्रेणी में रखने का दावा

एसआईआर प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के उपायों की मांग करते हुए, प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से आग्रह किया कि वे चुनाव आयोग से एसआईआर प्रक्रिया को कम से कम तीन महीने बढ़ाने और इसे पूरा करने के लिए एक साल का समय देने को कहें।

नाम हटाने से पहले घर-घर सत्यापन की अपील

संगठनों ने अधिकारियों से यह भी आग्रह किया कि 'शिफ्टेड' (दूसरी जगह चले गए), 'अनुपस्थित' और 'अन्य' कैटेगरी में रखे गए वोटरों के नाम तुरंत न हटाए जाएं।

उन्होंने कहा कि इसके बजाय, वोटर लिस्ट से कोई भी नाम हटाने से पहले बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करना चाहिए।

SIR की अवधि तीन महीने बढ़ाने की मांग

उन्होंने जरूरी फॉर्म और सुविधाएं भी मांगीं ताकि दूसरी जगह चले गए वोटर अपना वोटर रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर कर सकें और नए योग्य वोटरों को रजिस्ट्रेशन का मौका मिल सके।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा, "राज्य सरकार को खुद पहल करनी चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि योग्य वोटर वोटर लिस्ट में बने रहें। सरकारी कर्मचारियों को जानकारी देने के लिए घरों का दौरा करना चाहिए और वोटरों की मदद के लिए हेल्पलाइन सेंटर बनाए जाने चाहिए।"

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सुप्रीम कोर्ट का किया रुख

सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि अगर चुनाव आयोग सुधारात्मक कदम उठाने को तैयार न हो तो विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को एक प्रस्ताव पास करना चाहिए

और भारत के चुनाव आयोग पर अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए दबाव डालना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि अगर जरूरत हो तो सरकार को कर्नाटक में वोटरों के हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का भी रुख करना चाहिए।

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