लाडकी बहिन योजना (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

लाडकी बहिन योजना: एक गलत सवाल ने 24 लाख महिलाओं को बनाया 'सरकारी कर्मचारी', रुक गई किस्त; अब सरकार करेगी सुधार

Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र की 'लाडकी बहीण' योजना में ई-केवाईसी के दौरान तकनीकी गलती से लाखों महिलाओं की पात्रता पर संकट आ गया है। फॉर्म में एक भ्रमित सवाल के कारण लाभार्थियों का भुगतान अटक गया।

आकाश मसने

Ladki Bahin Yojana e-KYC Error: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण' योजना में एक बड़ी तकनीकी चूक सामने आई है। ई-केवाईसी प्रक्रिया में पूछे गए एक त्रुटिपूर्ण सवाल की वजह से राज्य की करीब 24 लाख महिला लाभार्थियों को सिस्टम ने गलती से 'सरकारी कर्मचारी' मान लिया, जिसके चलते उनकी मासिक आर्थिक सहायता रोक दी गई है।

फॉर्म की खराब शब्दावली ने पैदा किया भ्रम

महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार,लाडकी बहिन योजना के ई-केवाईसी फॉर्म में मराठी भाषा में एक प्रश्न पूछा गया था: "तुमच्या घरातले कोणी सरकारी नोकरीत नाही ना?" (आपके परिवार में कोई सरकारी नौकरी में नहीं है, है न?)। इस प्रश्न की जटिल और नकारात्मक बनावट ने महिलाओं को उलझन में डाल दिया। नियम के मुताबिक, जिन महिलाओं के घर में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है, उन्हें 'नहीं' चुनना था। लेकिन वाक्य की संरचना ऐसी थी कि लाखों लाभार्थियों ने अनजाने में 'हां' पर टिक कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि सिस्टम ने उन्हें अपात्र घोषित कर दिया और 1,500 रुपये की मासिक किस्त का वितरण स्वतः ही रुक गया।

डेटा समीक्षा में हुआ बड़ा खुलासा

जब विभाग ने डेटा की समीक्षा की, तो अधिकारी हैरान रह गए। आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में अर्ध-सरकारी निकायों को मिलाकर कुल 8 से 9 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, लेकिन योजना के रिकॉर्ड में 24 लाख से ज्यादा लाभार्थी परिवार सरकारी नौकरी वाले दिखने लगे। राज्य भर से किस्त न मिलने की शिकायतें आने के बाद जब जांच हुई, तब इस भाषाई त्रुटि का पता चला।

ग्राउंड जीरो पर उतरेंगी 1 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता

इस बड़ी गड़बड़ी को सुधारने के लिए सरकार ने अब 'फिजिकल वेरिफिकेशन' (भौतिक सत्यापन) का रास्ता चुना है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित महिलाओं के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए राज्य भर में लगभग एक लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को तैनात किया गया है। ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच करेंगी ताकि पात्र महिलाओं को दोबारा योजना से जोड़ा जा सके।

पारदर्शिता के लिए शुरू हुआ था ई-केवाईसी अभियान

प्रशासन ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया उन शिकायतों के बाद अनिवार्य की थी, जिनमें कहा गया था कि कुछ पुरुष या अपात्र लोग भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। 31 दिसंबर 2025 तक ई-केवाईसी पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। वर्तमान में सरकार करीब 2.25 करोड़ लाभार्थियों के लिए हर महीने 3,700 करोड़ रुपये का बजट जारी करती है। विभाग का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही रुकी हुई राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।

Air India Express: पोस्ट-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में 35 मिनट की देरी, 8 क्रू मेंबर्स सस्पेंड

DUSU Voting 2026: आज DU में मतदान, ABVP-NSUI के बीच सीधा मुकाबला, 2.75 लाख छात्र चुनेंगे नया छात्र संघ

Weather Alert: पहाड़ों पर समय से पहले बर्फबारी, मैदानी इलाकों में बारिश-बाढ़, यूपी समेत कई राज्यों में अलर्ट

UGC NET June 2026: इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी की फाइनल आंसर-की जारी, ऐसे करें डाउनलोड

iPhone 18 Pro खरीदने के लिए दिल्ली-मुंबई में लगी लंबी लाइन, रात से एप्पल स्टोर के बाहर जुटे लोग; देखें VIDEO