देवेंद्र फडणवीस (सोर्सः सोशल मीडिया)
मुंबई

टैक्स सुधार से लेकर कर्ज घटाने तक... महाराष्ट्र के वित्तीय कायाकल्प की जिम्मेदारी केलकर समिति के पास

Vijay Kelkar Committee: महाराष्ट्र में वित्तीय स्थिति सुधारने और टैक्स रिफॉर्म्स के लिए डॉ. विजय केलकर समिति का गठन किया गया है। जानिए इस हाई-लेवल पैनल की मुख्य जिम्मेदारियां और रोडमैप।

गोरक्ष पोफली

Maharashtra Kelkar Committee Financial Reforms: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और इसके लंबे समय के विकास के रोडमैप को सपोर्ट करने के लिए 'महाराष्ट्र सस्टेनेबल पब्लिक फाइनेंस कमेटी' बनाने की घोषणा की।

जाने-माने अर्थशास्त्री और पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव डॉ. विजय केलकर की अध्यक्षता में, इस हाई-लेवल पैनल का ऐलान बुधवार देर शाम किया गया। इसे टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू में टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने के उपाय सुझाने का काम सौंपा गया है।

'विकसित महाराष्ट्र 2047' का रणनीतिक विजन

यह फैसला राज्य के 'विकसित महाराष्ट्र 2047' विजन डॉक्यूमेंट का एक अहम हिस्सा है। इस डॉक्यूमेंट में महाराष्ट्र राज्य की अर्थव्यवस्था को 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का रणनीतिक रोडमैप बताया गया है, जो भारत की आजादी की 100वीं सालगिरह के समय के साथ मेल खाता है।

कमेटी के मुख्य कार्य और जिम्मेदारी

पैनल को टैक्स सिस्टम को आधुनिक बनाने, रेवेन्यू के नुकसान को रोकने और टैक्स दरों, फीस और छूट को तर्कसंगत बनाने, रेवेन्यू के नए स्रोतों की पहचान करने और पब्लिक एसेट्स व सरकारी कंपनियों से ज्‍यादा से ज्‍यादा रिटर्न पाने, सैलरी, पेंशन, ब्याज भुगतान और कल्याणकारी योजनाओं जैसे बढ़ते अनिवार्य खर्चों में संतुलन बनाते हुए सरकारी खर्च को सुव्यवस्थित करने और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स व बजट घाटे के लिए कर्ज पर निर्भरता कम करने के लिए आर्थिक रूप से जिम्मेदार रोडमैप तैयार करने का काम सौंपा गया है।

केलकर समिति के प्रमुख सदस्य

केलकर कमेटी में प्रो. कार्तिक मुरलीधरन (संस्थापक-निदेशक, सीईजीआईएस), डॉ. नितिन करीर (पूर्व मुख्य सचिव, महाराष्ट्र), टी. रबी शंकर (पूर्व डिप्टी गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक) और डॉ. आशिमा गोयल (अध्यक्ष, द इंडियन इकोनोमेट्रिक सोसाइटी) शामिल हैं।

यह पैनल ऐसे समय में बनाया गया है जब महाराष्ट्र एक अहम मोड़ पर है। राज्य इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन विकास, जल सुरक्षा, शहरी प्रबंधन और ऊर्जा परिवर्तन जैसे मुख्य क्षेत्रों में निवेश-आधारित विकास रणनीति पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है, लेकिन उसे बढ़ती वित्तीय चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

निजी पूंजी और फंडिंग के वैकल्पिक मॉडल

महाराष्ट्र सरकार के विजन डॉक्यूमेंट में सरकारी खर्च की नीति को लंबे समय के कैपिटल फॉर्मेशन (पूंजी निर्माण) के अनुरूप बनाने, फाइनेंसिंग के वैकल्पिक मॉडल और निजी पूंजी के प्रवाह की पहचान करने का सुझाव दिया गया है।

राजकोषीय घाटे के लक्ष्य 'फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट' (एफआरबीएम) के नियमों के दायरे में तय किए गए हैं। इसके तहत सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.8 प्रतिशत से 3.0 प्रतिशत घाटे का लक्ष्य रखा गया है और राजस्व घाटे को जीएसडीपी के 0.7 प्रतिशत से कम रखने की योजना है। इन लक्ष्यों को हासिल करने की प्रगति पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली 'विजन मैनेजमेंट यूनिट' हर तिमाही नजर रखती है।

बढ़ते खर्च और बाजार कर्ज की निर्भरता

कल्याणकारी योजनाओं के बढ़ते खर्च और कर्ज चुकाने की लागत के कारण एफआरबीएम एक्ट के तहत तय लक्ष्यों को पूरा करना मुश्किल रहा है। नतीजतन, सरकार को अक्सर कैपिटल प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाने और शॉर्ट-टर्म कैश की कमी को पूरा करने के लिए बाजार से कर्ज लेना पड़ा है।

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