देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

'लाल सैलाब' की गूंज के बाद बैकफुट पर आई फडणवीस सरकार, अब किसानों के बातचीत की तैयारी

Maharashtra Political News: नासिक से मुंबई की ओर बढ़ रहे हजारों किसानों के दबाव के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें बातचीत के लिए मंत्रालय बुलाया है। जानिए क्या हैं उनकी मुख्य मांगें।

आकाश मसने

Maharashtra Adivasi Land Rights Protest: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर 'लाल झंडों' की लहर दिखाई दे रही है। भूमि अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर नासिक से पैदल निकले हजारों किसानों और आदिवासियों के कड़े रुख को देखते हुए राज्य सरकार बैकफुट पर है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल को आज मुंबई में चर्चा के लिए आमंत्रित किया है।

दिंडोरी से शुरू हुआ संघर्ष

अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के नेतृत्व में यह 'लॉन्ग मार्च' रविवार को नासिक के दिंडोरी से शुरू हुआ था। दरअसल, प्रदर्शनकारी पिछले कई दिनों से दिंडोरी तहसील कार्यालय के बाहर डेरा डाले हुए थे, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान न मिलने पर उन्होंने सीधे मुंबई का रुख करने का फैसला किया। पूर्व विधायक और किसान नेता जेपी गावित ने बताया कि जब स्थानीय स्तर पर हमारी मांगों की अनदेखी की गई, तो हमें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा। किसान अपने साथ राशन, जलाऊ लकड़ी और खाना बनाने का सामान लेकर चल रहे हैं, जो उनके लंबे संघर्ष के इरादे को साफ दर्शाता है।

कसारा घाट पार कर ठाणे में प्रवेश

हजारों की संख्या में पुरुष और महिला किसान भीषण गर्मी और चुनौतीपूर्ण रास्तों की परवाह किए बिना आगे बढ़ रहे हैं। पिछले दो दिनों में इन प्रदर्शनकारियों ने लगभग 60 किलोमीटर की दूरी तय की है। मंगलवार सुबह इस मार्च ने कसारा घाट को पार कर ठाणे जिले की सीमा में प्रवेश किया। जैसे-जैसे यह काफिला मुंबई के करीब पहुंच रहा है, सरकार की हलचल बढ़ गई है।

मंत्रालय में आज होगी निर्णायक बैठक

मीडिया कवरेज और किसानों के बढ़ते दबाव का ही परिणाम है कि राज्य सरकार ने उनके प्रतिनिधिमंडल को मंगलवार को मंत्रालय (सचिवालय) बुलाया है। इस बैठक में मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों के मंत्री शामिल होंगे। प्रतिनिधिमंडल के मुख्य चेहरे में अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले, पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ किसान नेता जेपी गावित, राष्ट्रीय संयुक्त सचिव, किसान सभा के सदस्य अजीत नवले, विधायक विनोड निकोले शामिल हैं।

जिला स्तर बनाम राज्य स्तर की मांगें

नासिक के कलेक्टर आयुष प्रसाद के साथ हुई प्रारंभिक चर्चा में यह तय किया गया है कि स्थानीय प्रशासन उन मुद्दों को सुलझाएगा जो जिला स्तर के हैं। हालांकि, वन भूमि पर अधिकार (Forest Land Rights), कर्ज माफी और फसलों के उचित दाम जैसे नीतिगत मुद्दों पर फैसला केवल राज्य सरकार ही ले सकती है। अब सबकी नजरें मुंबई में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं कि क्या सरकार किसानों को ठोस लिखित आश्वासन देगी या यह आंदोलन मुंबई की सड़कों तक पहुंचेगा।

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