नशामुक्त चालक, सुरक्षित यात्रा, सक्षम महाराष्ट्र अभियान (सोर्सः AI)
मुंबई

नशे में ड्राइविंग पर महाराष्ट्र सरकार सख्त, 2026 से 2029 तक ST से लेकर निजी बस और कैब तक जांच के दायरे में

Drug Free Drivers Campaign: महाराष्ट्र में 2026 से 2029 तक नशामुक्त चालक, सुरक्षित यात्रा, सक्षम महाराष्ट्र अभियान चलेगा। बस, कैब, टैक्सी समेत विभिन्न वाहनों के चालकों की शराब और ड्रग जांच होगी।

आलोक उमाकृष्ण

Safe Passenger Travel In Maharashtra: यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए महाराष्ट्र में ‘नशामुक्त चालक, सुरक्षित यात्रा, सक्षम महाराष्ट्र’ अभियान चलाया जाएगा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि 2026 से 2029 तक शराब और नशीले पदार्थों की जांच व्यवस्था को व्यापक बनाया जाएगा।

एसटी महामंडल के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ड्राइवर और कंडक्टरों की ड्रग जांच के लिए 1 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। इस राशि से जांच मशीन खरीदी जाएगी।

मंत्री प्रताप सरनाईक ने दिए निर्देश

मंत्री प्रतीप सरनाईक ने कहा कि अभियान में एसटी महामंडल, मनपा बस सेवाएं, सरकारी वाहन, सार्वजनिक उपक्रम, ठेका वाहनों के साथ निजी बस, पर्यटक वाहन, टैक्सी, ऐप आधारित कैब, ऑटोरिक्शा और अनुबंधित यात्री परिवहन सेवाएं शामिल होंगी।

एमआईडीसी, कारखानों, कंपनियों, ठेकेदारों की कर्मचारी परिवहन सेवाओं के अलावा ट्रक, टैंकर, खतरनाक मालवाहक वाहन, गोदाम, वितरण केंद्र और बंदरगाह से जुड़ी परिवहन सेवाओं को भी दायरे में लाया जाएगा। स्कूल-कॉलेज, अस्पताल और एंबुलेंस के लिए अलग प्रावधान किए जाएंगे।

ड्यूटी से पहले शराब जांच, निर्धारित और अचानक ड्रग जांच तथा घटना या उचित संदेह की स्थिति में जांच की जाएगी। प्रशिक्षित कर्मचारी, प्रमाणित उपकरण और डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था विकसित होगी।

विशेष किट का होगा प्रयोग

नशीले पदार्थों की प्राथमिक जांच के लिए प्रमाणित विशेष किट का महाराष्ट्र राज्य में प्रयोग किया जाएगा। इससे पैकेट खोले बिना संदिग्ध पदार्थों की शुरुआती जांच संभव होगी। गांजा समेत विभिन्न नशीले पदार्थों की जांच के बाद जरूरत के अनुसार पुष्टि और कानूनी कार्रवाई होगी।

वैकल्पिक चालक कराया जाएगा उपलब्ध

प्रतीप सरनाईक ने यह भी कहा कि अभियान में सख्ती के साथ काउंसलिंग, इलाज और पुनर्वास पर भी जोर रहेगा। जोखिम मिलने पर चालक को अस्थायी रूप से ड्यूटी से हटाकर वैकल्पिक चालक उपलब्ध कराया जाएगा। जांच से जुड़ी निजी जानकारी की गोपनीयता भी सुरक्षित रखी जाएगी।

बनेगी व्यवस्था

वाहन मालिकों, परिवहन कंपनियों, उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय होगी। परिवहन, गृह, उद्योग, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और शिक्षा विभागों के समन्वय से राज्य, जिला और संस्थान स्तर पर व्यवस्था बनेगी।

डिजिटल निगरानी के जरिए जांच, प्रशिक्षण, उपकरण, चिकित्सा संदर्भ और अनुपालन की समीक्षा होगी। 2026 से 2029 के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

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